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नमक वाले पानी में पैर रखने से क्या होता है? आयुर्वेद ने बताया तन और मन को डिटॉक्स करने का सरल तरीका

Salt Water Foot Soak: आयुर्वेद में पाद-स्नान यानी पैरों को गुनगुने नमक जल में रखने की प्रक्रिया मन और तन को शांत करने में मदद करती है.

नमक वाले पानी में पैर रखने से क्या होता है? आयुर्वेद ने बताया तन और मन को डिटॉक्स करने का सरल तरीका
Salt Water Foot Soak: नमक वाले पैर में पानी रखने के फायदे.

What Is Paad Snaan: दिन भर काम की थकान शरीर और मन दोनों को बोझिल कर देती है. लगता है कि शरीर में ऊर्जा की कमी हो रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि दिनभर की थकान सिर्फ़ शरीर में नहीं ठहरती, वह मन को भी प्रभावित करती है. समझ नहीं आता कि क्या करना है, दवा लेनी भी है या नहीं, मन विचलित होता है. ऐसा होना मन और तन की थकान को दिखाता है, जिसका इलाज आर्युवेद के एक नुस्खे में छिपा है. आयुर्वेद में पाद-स्नान यानी पैरों को गुनगुने नमक जल में रखने की प्रक्रिया मन और तन को शांत करने में मदद करती है.

आयुर्वेद में पाद-स्नान (पैरों को गुनगुने नमक जल में रखना) एक सरल संध्या-अभ्यास माना गया है, जो शरीर के भारीपन को कम करता है और मन को विश्राम की दिशा देता है. इससे शरीर और मन के तनाव में कमी होती है और पूरा शरीर रिलैक्स महसूस करता है. इसके लिए सेंधा या समुद्री नमक मिले गुनगुने जल में 10–15 मिनट शांत बैठकर केवल श्वास पर ध्यान रखें. यह एक सौम्य “बॉडी डिटॉक्स” अभ्यास है, जो नाड़ी-तंत्र को स्थिरता का संकेत देता है.

पैरों को गुनगुने नमक पानी में रखने के फायदे- (Benefits of keeping feet in lukewarm salt water)

1. दर्द-

पाद-स्नान करने से शरीर हल्का होता है और मन खुद-ब-खुद शांत होने लगता है. शरीर में होने वाले हल्के दर्द और थकान से भी राहत मिलती है. 

2. नींद-

इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है और नींद भी बहुत अच्छी आती है. 

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3. लाइट महसूस होना-

पाद-स्नान के बाद शरीर का बोझिल होना कम होता है और मन को भी आराम की अनुभूति होती है. पाद-स्नान में नमक का इस्तेमाल किया जाता है, जो सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है बल्कि ये शरीर के भारीपन को कम करने और शरीर को संतुलित करने में मदद करता है. 

4. बेचैनी-

नमक मन की बेचैनी को संतुलित करने में मदद करता है, जो पानी के साथ मिलकर नाड़ियों के तंत्रिका-तंत्र को शांत करता है.

क्या कहता है आयु्र्वेद-

आयुर्वेद में पाद स्नान को चमत्कार की तरह माना गया है. अगर रोजाना शाम के वक्त कमजोरी और मन भारी महसूस होता है, तो ये क्रिया शरीर को संतुलित करने में मदद करेगी. इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना सही रहेगा. पाद-स्नान मन की एकाग्रता को भी बढ़ाता है. आज का काम शरीर के साथ-साथ मन की थकावट का बड़ा कारण है. पाद स्नान की मदद से तनाव को कम कर मस्तिष्क को आराम दिया जा सकता है. ये शरीर में हैप्पी हॉर्मोन के उत्पादन को बढ़ाती है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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