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मेरा बेटा एग्जाम और स्कूल टेस्ट का नाम सुनते ही बीमार हो जाता था, इन 5 आसान तरीकों से मैंने दूर भगाया उसका डर

Study Motivation: क्या आपके बच्चे भी एग्जाम का नाम लेते सुनते ही बनाने लगते हैं बहाने, अगर हां तो इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें.

मेरा बेटा एग्जाम और स्कूल टेस्ट का नाम सुनते ही बीमार हो जाता था, इन 5 आसान तरीकों से मैंने दूर भगाया उसका डर
Parenting Tips: बच्चों के मन से एग्जाम का डर कैसे दूर करें.

Overcoming Fear of Exams: बबिता सिंह एक हाउस वाइफ हैं और वे दो बच्चों की मां हैं. हाल ही में मेरी उनसे मुलाकात हुई जिसमें वो अपने बच्चों को लेकर बात करने लगीं, कि एक समय तक ऐसा था कि जब भी एग्जाम या स्कूल के टेस्ट आते थे उनके बच्चे बीमार पड़ जाते थे. पहले तो उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर पेपर या टेस्ट का नाम लेते ही बच्चे बीमार क्यों पड़ जाते हैं, फिर उन्होंने ध्यान देना शुरू किया और उन्हें पता चला कि बच्चों के बीमार होने की असली वजह उनका डर था. तो चलिए जानते हैं उन्होंने कैसे इस डर को अपने बच्चों के मन से दूर किया.

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दरअसल कुछ बच्चे एग्जाम की डेटशीट आते ही बहाने बनाने लगते है कि उन्हें बुखार है, पेट दर्द है या वाकई बीमार पड़ जाते हैं. आपको बता दें कि इसे 'एग्जाम एंग्जाइटी' यानी परीक्षा का डर कहते हैं.

बच्चे को तनाव से बाहर निकालने के लिए अपनाएं ये टिप्स-

1. पढ़ाई में मदद की-

बबिता ने बताया कि मैंने समझा कि उनका बेटा एग्जाम और टेस्ट का नाम लेते ही बीमार पड़ जाता है, तो हमने उससे पॉजिटिव बाते करना शुरू किया और पढ़ाई में उसकी मदद की. जो विषय उसे समझ नहीं आता था उसमें उसको अच्छे से समझाना और पढ़ाना. कठिन टॉपिक्स को मैंने उसे कहानियों की तरह समझाना शुरू किया, जिससे उसे पढ़ाई में मजा आने लगा. 

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​2. नंबरों का डर दूर किया- 

​उन्होंने बताया कि हम अनजाने में बच्चे पर यह दबाव डाल देते हैं कि उसे फला के बच्चे से ज्यादा नंबर लाने हैं. मैंने सबसे पहले अपने बेटे से यह कहना बंद किया कि तुम्हें टॉप करना है. मैंने उसे समझाया कि एग्जाम सिर्फ यह देखने के लिए है कि तुमने कितना सीखा है, न कि यह कि तुम कितने होशियार हो. जब नंबरों का बोझ हटा, तो उसका डर अपने आप कम होने लगा.

​3. निगरानी कम की- 

​एग्जाम आते ही मैं अक्सर उसके सिर पर सवार होकर बैठती थी, जिससे वह और डर जाता था. फिर मैंने तरीका बदला. अब मैं उसके पास बैठती तो हूं, लेकिन अपना काम करने के लिए. उसे लगता है कि मां साथ है, लेकिन कोई उसे जज नहीं कर रहा, तो वो और मन लगाकर पढ़ता है. 

​4. नींद- 

​एग्जाम के डर की वजह से मेरा बेटा कम सोता था. फिर मैने उसकी नींद में भी ध्यान देना शुरू किया और उसे समय से सुलाना शुरू किया. नींद पूरी होने से उसका दिमाग भी फ्रेश रहता और बीमार होने से भी बचता.

5. हेल्दी डाइट-

पहले कई बार मेरा बेटा सुबह एग्जाम देने जाता था, तो डर की वजह से वो कुछ खाता नहीं था. जिसके चलते उसकी तबीयत बिगड़ जाती थी. अब मैं उसे सुबह कुछ न कुछ खिलाकर भेजती हूं. 

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(बबीता अपनी असली पहचान साझा नहीं करना चाहतीं, इसलिए उनकी सभी तस्वीर प्रतीकात्‍मक हैं और एआई से बनवाई गई हैं.)

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