Raw Vegetables Side Effects: आजकल लोग सेहतमंद रहने के लिए अपनी डाइट में कच्ची सब्जियों को तेजी से शामिल कर रहे हैं. हालांकि, हर सब्जी को कच्चा खाना सही नहीं होता. कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं जिन्हें बिना पकाए खाने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन-सी सब्जियां किस तरीके से खानी चाहिए, ताकि उनसे पूरा पोषण मिल सके और सेहत पर कोई नकारात्मक असर भी न पड़े.

किन सब्जियों को कच्चा नहीं खाना चाहिए?
कुछ सब्जियों में प्राकृतिक तत्व ऐसे होते हैं जो कच्चे रूप में शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं.
- ब्रोकली
- फूलगोभी
- पत्तागोभी
जैसी सब्जियों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो थायरॉइड के काम में बाधा डाल सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिनके शरीर में आयोडीन की कमी होती है. इन सब्जियों को हल्का पकाने से इनके हानिकारक तत्व कम हो जाते हैं और ये पचाने में भी आसान हो जाती हैं.
क्या कच्चा बैंगन खाना सुरक्षित है?
नहीं, बैंगन में पाया जाने वाला सोलानिन नामक तत्व कच्चे रूप में आंतों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. यही वजह है कि इसे हमेशा पकाकर खाने की सलाह दी जाती है
क्या मशरूम को कच्चा खा सकते हैं?
मशरूम पर भी यही बात लागू होती है. इसमें कुछ ऐसे कंपाउंड होते हैं जिन्हें शरीर कच्चे रूप में ठीक से पचा नहीं पाता, जबकि पकाने से ये सुरक्षित और सुपाच्य बन जाते हैं.
क्या मैं चुकंदर और पालक को कच्चा खा सकती हूं?
पालक और चुकंदर के पत्तों को भी लेकर सावधानी जरूरी है, इनमें ऑक्सालेट नामक तत्व ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है. अगर इन्हें कच्चा खाया जाए, तो यह किडनी से जुड़ी समस्याओं का कारण भी बन सकता है. इसलिए इनका सेवन संतुलित मात्रा में और सही तरीके से पकाकर करना बेहतर माना जाता है.

कच्ची सब्जी खाने के क्या हैं नुकसान?
पाचन तंत्र पर असर पड़ता है. हालांकि इनमें फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं, लेकिन हर व्यक्ति का पाचन तंत्र एक जैसा मजबूत नहीं होता. जिन लोगों को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) जैसी समस्या होती है या जिनकी आंतें संवेदनशील होती हैं, उन्हें कच्ची सब्जियां ज्यादा खाने से पेट फूलना, गैस और असहजता महसूस हो सकती है. ऐसे में उनके लिए हल्की पकी हुई सब्जियां ज्यादा फायदेमंद होती हैं.
सब्जी पकाने का सही तरीका
बहुत ज्यादा पकाने से विटामिन सी और बी नष्ट हो सकते हैं, जबकि बहुत कम पकाने से हानिकारक तत्व बने रह सकते हैं. ऐसे में भाप में पकाना एक बेहतर तरीका माना जाता है.
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