"गोंडोला का केबिन धीरे-धीरे ऊपर जा रहा था. बाहर सिर्फ सफेद बर्फ की चादर थी. उसी वक्त रोहित ने पहली बार मेरा हाथ पकड़ा था..."
यह कहते हुए रिचा के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान आ जाती है. लेकिन अगले ही पल उनकी आवाज उदास हो जाती है. वजह? गुलमर्ग से आई एक बुरी खबर. इस खबर ने उनकी इस साल की एनिवर्सरी के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है.
रिचा ने एनडीटीवी को बताया कि उनकी कहानी बहुत पुरानी है. उस ट्रिप में गोंडोला की सवारी के दौरान दोनों को पहली बार एहसास हुआ कि उनकी दोस्ती शायद कुछ और बन चुकी है. दोस्ती प्यार में बदली, शादी हुई और फिर एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जो पिछले डेढ़ दशक से कभी नहीं टूटा. शादी के बाद से ये दोनों हर साल अपनी एनिवर्सिरी यहीं सेलिब्रेट कर रहे थे.
15 साल, और एक ही जगह!
रिचा और रोहित की लव स्टोरी 15 साल पुरानी है. इसी गोंडोला राइड में दोनों को लगा था- 'बॉस, ये सिर्फ दोस्ती नहीं है, कुछ और है!' दोस्ती प्यार में बदली. फिर बैंड-बाजा-बारात हुई.
शादी के बाद दोनों ने एक पक्का वादा किया. चाहे जो हो जाए, हर साल एनिवर्सरी पर गुलमर्ग जाएंगे. गोंडोला की सवारी जरूर करेंगे.
कभी सिर्फ दो दिन की छुट्टी मिली.
कभी पूरा हफ्ता गुजारने का मौका मिला.
कभी कड़ाके की बर्फबारी मिली, तो कभी हरी-भरी वादियां.
मौसम बदला, साल बदले, लेकिन उनका यह हनीमून फिक्स रहा. रिचा के लिए यह सिर्फ घूमना नहीं, अपनी मोहब्बत को दोबारा जीना था.
यह कहते हुए रिचा मुस्कुरा तो देती हैं, लेकिन अगले ही पल उनकी आवाज थोड़ी धीमी पड़ जाती है. वजह है गुलमर्ग गोंडोला से जुड़ी वह खबर, जिसने इस साल उनके सबसे पसंदीदा एनिवर्सरी प्लान पर पानी फेर दिया है.
...और टूट गया 15 साल पुराना रिकॉर्ड
इस साल भी पैकिंग लगभग तय थी. होटल बुक होने ही वाले थे. टिकटें देखी जा रही थीं. तभी अचानक खबर आई- 'गुलमर्ग गोंडोला सर्विस अगले आदेश तक बंद!'
रिचा कहती हैं, "पहले लगा दो-चार दिन की बात होगी. पर जब पता चला कि खुलने की कोई तारीख ही तय नहीं है, तो दिल टूट गया. 15 साल में पहली बार हमारी एनिवर्सरी का यह खूबसूरत सिलसिला टूटने जा रहा है."

gulmarg gondola closed.
आखिर हुआ क्या था?
कुछ हफ्ते पहले गोंडोला में कोई तकनीकी खराबी आ गई थी. करीब 300 सैलानी हवा में ही अटक गए थे. जान है तो जहान है! इसलिए प्रशासन ने पूरे सिस्टम की बारीकी से जांच शुरू कर दी है. जब तक सब कुछ 100% सेफ नहीं हो जाता, केबिन नहीं उड़ेगी.
ये सिर्फ एक राइड नहीं, इमोशन है!
रोहित और रिचा अकेले नहीं हैं. हर साल लाखों लोग गुलमर्ग पहुंचते हैं. किसी के लिए गोंडोला हनीमून की पहली सेल्फी है. किसी के लिए बच्चों के साथ बर्फ का पहला दीदार. तो किसी के लिए कश्मीर का सबसे जादुई एहसास.
तभी तो, गोंडोला का बंद होना सिर्फ टूरिज्म की हेडलाइन नहीं है. यह उन हजारों दिलकश यादों का ठहर जाना है, जो इन वादियों में हवा के साथ तैरती हैं.
रिचा और रोहित को अब भी उम्मीद है कि शायद कोई चमत्कार हो जाए, और उनकी यादों का केबिन एक बार फिर हवा से बातें करने लगे!
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