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मोबाइल रील्स की लत बन रही कम उम्र में सर्वाकल पेन की वजह? गर्दन और रीड पर पड़ रहा सीधा असर

Mobile Reel Addiction: आजकल कम उम्र में ही लोगों को गर्दन दर्द, अकड़न और सर्वाइकल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. पहले जो दिक्कतें 40-50 की उम्र में होती थीं, वही अब 20-25 साल के युवाओं में दिखने लगी हैं.

मोबाइल रील्स की लत बन रही कम उम्र में सर्वाकल पेन की वजह? गर्दन और रीड पर पड़ रहा सीधा असर
Mobile Reel Addiction: रील्स देखते समय व्यक्ति अक्सर लंबे समय तक गर्दन को हिलाता नहीं.

Cervical Pain Causes: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह आंख खुलते ही नोटिफिकेशन चेक करना और रात को सोने से पहले आखिरी बार रील्स देखना अब आम बात हो गई है. ऑफिस का काम हो या खाली समय, शॉर्ट वीडियो यानी रील्स हर उम्र के लोगों का पसंदीदा मनोरंजन बन चुके हैं. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सब बिना समय का अंदाजा लगाए रील्स देखते रहते हैं. देखने में यह आदत बेहद सामान्य लगती है, लेकिन डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एक साइलेंट हेल्थ प्रॉब्लम मानते हैं.

आजकल कम उम्र में ही लोगों को गर्दन दर्द, अकड़न और सर्वाइकल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. पहले जो दिक्कतें 40-50 की उम्र में होती थीं, वही अब 20-25 साल के युवाओं में दिखने लगी हैं. इसकी एक बड़ी वजह लगातार मोबाइल पर रील्स देखना और घंटों तक एक ही पोजीशन में बैठे रहना है.

रील्स देखते समय गर्दन पर क्या असर पड़ता है?

मेडिकल विज्ञान के अनुसार, जब हम मोबाइल देखते हैं तो सिर अक्सर आगे की ओर झुका रहता है. सामान्य स्थिति में गर्दन पर सिर का वजन लगभग 5 किलो होता है. सिर आगे झुकते ही यह दबाव 20-25 किलो तक पहुंच सकता है. इस बढ़े हुए दबाव से गर्दन की मांसपेशियों और नसों पर ज्यादा जोर पड़ता है. लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहे, तो सर्वाइकल स्पाइन को नुकसान होने लगता है.

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एक ही पोजीशन में बैठना क्यों है खतरनाक?

रील्स देखते समय व्यक्ति अक्सर लंबे समय तक गर्दन को हिलाता नहीं, कंधे और पीठ को आराम नहीं देता, शरीर को स्ट्रेच नहीं करता. इससे गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में जकड़न आने लगती है. यही जकड़न धीरे-धीरे तेज दर्द में बदल जाती है, जो गर्दन से कंधों और बाजुओं तक फैल सकता है.

रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ता है असर:

गलत पोस्चर सिर्फ गर्दन ही नहीं, पूरी रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है. रीढ़ की प्राकृतिक बनावट बिगड़ने लगती है. गर्दन का ऊपरी हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में सर्वाइकल स्पाइन डिसऑर्डर कहा जाता है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है.

दिमाग और आंखों पर भी पड़ता है असर:

रील्स की लत सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक परेशानी भी बढ़ाती है. आंखों में जलन और धुंधलापन, सिरदर्द और चक्कर, दिमाग का लगातार एक्टिव रहना. तनाव बढ़ने से मांसपेशियों का दर्द और ज्यादा महसूस होता है, जिससे गर्दन की समस्या और गंभीर हो जाती है.

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

  • गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न.
  • कंधों और बाजुओं में दर्द.
  • हाथों में झनझनाहट.
  • बार-बार सिरदर्द.

डॉक्टरों के मुताबिक, ये नसों पर दबाव के संकेत हो सकते हैं. समय रहते मोबाइल की आदत पर कंट्रोल और सही पोस्चर अपनाया जाए, तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
लेखक के बारे में
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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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