मैं राजदीप हूं, उम्र 32 साल. ये कहानी सिर्फ खाने की नहीं है, बल्कि उस बदलाव की है जिसे मैंने खुद अपने शरीर में महसूस किया. पहले मेरी लाइफ बिल्कुल नॉर्मल थी, या यूं कहूं कि मुझे वही नॉर्मल लगती थी. हफ्ते में 4-5 बार बाहर का खाना, ऑफिस के बाद फास्ट फूड, काम-काज के सिलसिले में डिनर तो अक्सर बाहर ही लेता था. शुरुआत में सब ठीक लगता था, लेकिन धीरे-धीरे शरीर छोटे-छोटे सिग्नल देने लगा था. पेट भारी रहना, सुबह उठते ही थकान महसूस होना, स्किन पर डलनेस और सबसे बड़ी बात, हर समय एक अजीब सी सुस्ती. उस समय मैंने इसे ज्यादा सीरियसली नहीं लिया, लेकिन, एक दिन आईने में खुद को देखकर लगा कि कुछ तो गलत हो रहा है. तभी मैंने फैसला किया कि 60 दिन तक पूरी तरह बाहर का खाना बंद करूंगा.
शुरुआत बहुत मुश्किल लग रही थी

सबसे पहला बदलाव मैंने अपनी एनर्जी में देखा. सुबह उठना पहले से आसान लगने लगा. पहले जहां अलार्म के बाद भी 10-15 मिनट तक बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता था, लेकिन अब बिस्तर छोड़ने में ज्यादा परेशानी नहीं होती थी. दिन भर में जो सुस्ती छाई रहती थी, वो काफी हद तक कम हो गई.
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सबसे बड़ी बात पेट की दिक्कत कम हुई
तीसरे हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते मेरा डाइजेशन काफी बेहतर हो गया. पहले जो पेट भारी रहता था, गैस और ब्लोटिंग की दिक्कत होती थी, वो लगभग खत्म हो गई. खाने के बाद अब शरीर हल्का महसूस करता था. ये मेरे लिए सबसे बड़ा सरप्राइज था, क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि सिर्फ बाहर का खाना बंद करने से इतना फर्क पड़ सकता है.
स्किन में आया गजब का बदलाव

क्रेविंग्स घटी, हेल्दी खाना पसंद आने लगा
सबसे दिलचस्प बदलाव मेरी क्रेविंग्स में आया. जो चीजें पहले बहुत पसंद थीं, जैसे बर्गर या फ्राइड फूड उनकी चाहत धीरे-धीरे कम होने लगी. 45 दिन के बाद तो ऐसा लगने लगा कि अब शरीर खुद ही हेल्दी खाना पसंद करने लगा है. ये बदलाव पूरी तरह बायोलॉजिकल फील हुआ, जैसे शरीर खुद अपना पैटर्न रीसेट कर रहा हो.
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वजन भी होने लगा कम
60 दिन पूरे होने तक मेरा वजन भी थोड़ा कम हुआ, लेकिन उससे ज्यादा अहम बात ये थी कि मैं अंदर से ज्यादा एक्टिव और स्टेबल महसूस कर रहा था. मूड स्विंग्स कम हो गए थे, फोकस बेहतर हो गया था, और दिनभर में थकान बहुत कम लगती थी. अब जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो समझ आता है कि बाहर का खाना सिर्फ स्वाद नहीं देता, वो धीरे-धीरे शरीर की नॉर्मल फंक्शनिंग को भी प्रभावित करता है. ये 60 दिन मेरे लिए एक तरह का रीसेट थे.
मैं ये नहीं कहता कि जिंदगी-भर बाहर का खाना बिल्कुल बंद कर देना चाहिए, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि अगर आप कुछ समय के लिए भी इसे कंट्रोल कर लें, तो आपका शरीर आपको खुद बता देगा कि सही क्या है और गलत क्या.
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