विज्ञापन

मैंने 60 दिन तक बाहर का खाना छोड़ा… और बदल गई मेरी जिंदगी, 32 साल के राजदीप की कहानी ने किया हैरान

No Outside Food Challenge: 60 दिनों तक बाहर का खाना छोड़ना बहुत मुश्किल था, लेकिन 32 साल के राजदीप ने इस संकल्प के साथ न सिर्फ हेल्दी खाना खाया बल्कि जिंदगी ही बदल डाली.

मैंने 60 दिन तक बाहर का खाना छोड़ा… और बदल गई मेरी जिंदगी, 32 साल के राजदीप की कहानी ने किया हैरान
No Outside Food Challenge: राजदीप का कहना है, उसके लिए ये बिल्कुल बी आसान नहीं था. (AI Image)

मैं राजदीप हूं, उम्र 32 साल. ये कहानी सिर्फ खाने की नहीं है, बल्कि उस बदलाव की है जिसे मैंने खुद अपने शरीर में महसूस किया. पहले मेरी लाइफ बिल्कुल नॉर्मल थी, या यूं कहूं कि मुझे वही नॉर्मल लगती थी. हफ्ते में 4-5 बार बाहर का खाना, ऑफिस के बाद फास्ट फूड, काम-काज के सिलसिले में डिनर तो अक्सर बाहर ही लेता था. शुरुआत में सब ठीक लगता था, लेकिन धीरे-धीरे शरीर छोटे-छोटे सिग्नल देने लगा था. पेट भारी रहना, सुबह उठते ही थकान महसूस होना, स्किन पर डलनेस और सबसे बड़ी बात, हर समय एक अजीब सी सुस्ती. उस समय मैंने इसे ज्यादा सीरियसली नहीं लिया, लेकिन, एक दिन आईने में खुद को देखकर लगा कि कुछ तो गलत हो रहा है. तभी मैंने फैसला किया कि 60 दिन तक पूरी तरह बाहर का खाना बंद करूंगा.

शुरुआत बहुत मुश्किल लग रही थी

ये मेरे लिए एक तरह का चैलेंज था. शुरुआत आसान नहीं थी. पहले ही हफ्ते में क्रेविंग इतनी ज्यादा हुई कि कई बार लगा कि छोड़ दूं. लेकिन, मैंने खुद को कंट्रोल किया और घर का सिंपल खाना शुरू रखा. पहले 7-10 दिन मेरे लिए सबसे मुश्किल रहे. शरीर जैसे पुराने पैटर्न को मिस कर रहा था. कभी हल्का सिरदर्द, कभी चिड़चिड़ापन और बार-बार कुछ जंक खाने की इच्छा. लेकिन, करीब 2 हफ्ते बाद चीजें धीरे-धीरे बदलने लगीं.

सबसे पहला बदलाव मैंने अपनी एनर्जी में देखा. सुबह उठना पहले से आसान लगने लगा. पहले जहां अलार्म के बाद भी 10-15 मिनट तक बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता था, लेकिन अब बिस्तर छोड़ने में ज्यादा परेशानी नहीं होती थी. दिन भर में जो सुस्ती छाई रहती थी, वो काफी हद तक कम हो गई.

ये भी पढ़ें: भारत में दूध के पैकेटों पर नीले, हरे और नारंगी रंग क्यों होते हैं? कौन सा दूध आपके लिए परफेक्ट?

सबसे बड़ी बात पेट की दिक्कत कम हुई

तीसरे हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते मेरा डाइजेशन काफी बेहतर हो गया. पहले जो पेट भारी रहता था, गैस और ब्लोटिंग की दिक्कत होती थी, वो लगभग खत्म हो गई. खाने के बाद अब शरीर हल्का महसूस करता था. ये मेरे लिए सबसे बड़ा सरप्राइज था, क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि सिर्फ बाहर का खाना बंद करने से इतना फर्क पड़ सकता है.

स्किन में आया गजब का बदलाव

एक और बड़ा बदलाव मेरी स्किन में आया. करीब एक महीने बाद लोगों ने नोटिस करना शुरू किया कि चेहरा थोड़ा क्लियर लग रहा है. पहले जो ऑयलीनेस और डलनेस थी, वो कम हो गई. मुझे खुद भी आईने में फर्क साफ दिख रहा था.

क्रेविंग्स घटी, हेल्दी खाना पसंद आने लगा

सबसे दिलचस्प बदलाव मेरी क्रेविंग्स में आया. जो चीजें पहले बहुत पसंद थीं, जैसे बर्गर या फ्राइड फूड उनकी चाहत धीरे-धीरे कम होने लगी. 45 दिन के बाद तो ऐसा लगने लगा कि अब शरीर खुद ही हेल्दी खाना पसंद करने लगा है. ये बदलाव पूरी तरह बायोलॉजिकल फील हुआ, जैसे शरीर खुद अपना पैटर्न रीसेट कर रहा हो.

ये भी पढ़ें: मई में बालकनी या किचन गार्डन में लगाएं ये 3 पौधे, दो महीने में ही देने लगेंगे भर-भरकर सब्जियां

वजन भी होने लगा कम

60 दिन पूरे होने तक मेरा वजन भी थोड़ा कम हुआ, लेकिन उससे ज्यादा अहम बात ये थी कि मैं अंदर से ज्यादा एक्टिव और स्टेबल महसूस कर रहा था. मूड स्विंग्स कम हो गए थे, फोकस बेहतर हो गया था, और दिनभर में थकान बहुत कम लगती थी. अब जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो समझ आता है कि बाहर का खाना सिर्फ स्वाद नहीं देता, वो धीरे-धीरे शरीर की नॉर्मल फंक्शनिंग को भी प्रभावित करता है. ये 60 दिन मेरे लिए एक तरह का रीसेट थे.

मैं ये नहीं कहता कि जिंदगी-भर बाहर का खाना बिल्कुल बंद कर देना चाहिए, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि अगर आप कुछ समय के लिए भी इसे कंट्रोल कर लें, तो आपका शरीर आपको खुद बता देगा कि सही क्या है और गलत क्या.

ये भी पढ़ें: क्या आप भी फेंक देते हैं AC से टपकने वाला पानी? जानिए इसके ऐसे इस्तेमाल जो बचाएंगे पैसा और मेहनत

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com