ज्यादातर माता-पिता की शिकायत होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई करने के नाम पर मुंह बना लेता है. बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, या किताब खोलते ही उसका मन भटकने लगता है. ऐसे में पेरेंट्स बच्चे को आलसी समझ लेते हैं या पढ़ाई के लिए डांटने या दबाव बनाने लगते हैं. अब, अगर आप भी ऐसा ही कुछ कर रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. फेमस पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में पेरेंटिंग कोच ने 3 आसान तरीके बताए हैं. रिद्धि देवराह कहती हैं, अगर पेरेंट्स इन 3 तरीकों को अपना लें, तो बच्चा खुद पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाने लगेगा. आइए जानते हैं इनके बारे में-
क्या कहती हैं एक्सपर्ट?
पेरेंटिंग कोच बताती हैं, अगर आपका बच्चा भी पढ़ाई से बचता है, तो 3 आसान स्टेप्स को अपनी आदत बना लें.
नंबर 1- रोज 10 मिनट सिर्फ बच्चे के लिए निकालेंरिद्धि देवराह कहती हैं कि हर दिन 10 मिनट ऐसा समय जरूर रखें, जब आप सिर्फ अपने बच्चे के साथ रहें. इस दौरान पढ़ाई, होमवर्क, स्कूल, परीक्षा या नंबर की कोई बात बिल्कुल न करें. बच्चे के साथ खेलें, बातें करें, हंसें या उसकी पसंद की चीजें करें. इससे बच्चे को अच्छा महसूस होता है और उसका तनाव कम होने लगता है. जब बच्चा खुश और आराम महसूस करता है, तो उसका दिमाग नई चीजें सीखने के लिए भी तैयार होता है.
नंबर 2- पढ़ाई की शुरुआत पसंदीदा सब्जेक्ट से करेंहर बच्चे का कोई न कोई पसंदीदा सब्जेक्ट जरूर होता है. पढ़ाई हमेशा उसी सब्जेक्ट से शुरू करें. जब बच्चा अपनी पसंद की चीज पढ़ता है, तो उसका मन जल्दी लगता है. इससे उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है. इसके बाद दूसरे मुश्किल सब्जेक्ट पढ़ना भी उसके लिए आसान हो जाता है. इस तरह पढ़ाई बोझ नहीं लगती और बच्चा धीरे-धीरे बाकी सब्जेक्ट्स में भी रुचि लेने लगता है.
नंबर 3- बीच-बीच में ब्रेक है जरूरीपेरेंटिंग कोच आगे कहती हैं, ये सबसे जरूरी स्टेप है. लगातार लंबे समय तक पढ़ाई करने से बच्चे जल्दी थक जाते हैं. इसलिए हर 20 मिनट की पढ़ाई के बाद 5 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर दें. इस समय बच्चा थोड़ा टहल सकता है, पानी पी सकता है, स्ट्रेचिंग कर सकता है या थोड़ी देर आराम कर सकता है. छोटा-सा ब्रेक लेने से बच्चा फिर खुद को फ्रेश फील करता है और फिर से ध्यान लगाकर पढ़ाई कर पाता है. इससे अलग पढ़ाई के दौरान बच्चे की गलतियों पर बार-बार डांटने के बजाय उसकी हिम्मत बढ़ाएं. इससे उसका आत्मविश्वास बना रहता है.
पेरेंटिंग कोच कहती हैं, अगर घर का माहौल अच्छा होगा, बच्चे पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं होगा और माता-पिता उसे प्यार और समझ के साथ पढ़ाएंगे, तो धीरे-धीरे उसका पढ़ाई में खुद मन लगने लगेगा. यही छोटी-छोटी बातें उसे बेहतर तरीके से सीखने और आगे बढ़ने में सबसे ज्यादा मदद करेंगी.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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