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केमिकल वाले केले की पहचान कैसे करें? ये 10 सेकंड का फॉर्मूला जान लीजिए, ठेले वाले भी नहीं बता पाएंगे

Fake vs Real Bananas: केला सबसे हेल्दी फल माना जाता है. लेकिन, अगर इसे केमिकल से पकाया जाए तो सेहत के लिए नुकसान भी कर सकता है. क्या आप जानते हैं केमिकल से पके कैसे की पहचान कैसे करें? अगर नहीं, तो यहां 10 सेकंड फॉर्मुला जान लीजिए.

केमिकल वाले केले की पहचान कैसे करें? ये 10 सेकंड का फॉर्मूला जान लीजिए, ठेले वाले भी नहीं बता पाएंगे
Chemical Banana Test: केमिकल से पके केले की पहचान करने के टिप्स. (AI Image)

How to Identify Carbide Bananas: आजकल बाजार में मिलने वाला हर पीला केला सेहत के लिए अच्छा हो, ऐसा जरूरी नहीं है. दिखने में एकदम चमकदार और एक जैसे पीले केले अक्सर हमें आकर्षित करते हैं, लेकिन इनके पीछे का सच थोड़ा डराने वाला हो सकता है. बढ़ती मांग और जल्दी मुनाफा कमाने के चक्कर में कई व्यापारी फलों को नेचुरल तरीके से नहीं, बल्कि केमिकल से पकाने लगे हैं. ऐसे केले बाहर से तो परफेक्ट दिखते हैं, लेकिन अंदर से सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सबसे बड़ी बात इनकी पहचान करना आसान नहीं होता. लेकिन, अगर आप कुछ छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें, तो सिर्फ 10 सेकंड में असली और नकली (केमिकल वाले) केले का फर्क समझ सकते हैं. आइए जानते हैं पूरा सच.

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आपको जानकर हैरानी होगी कि बाजार में मिलने वाले केले तीन अलग-अलग तरीकों से पकाए जाते हैं और हर तरीका अलग असर डालता है.

1. पारंपरिक तरीका (लकड़ी की गर्मी से)

यह सबसे पुराना और प्राकृतिक तरीका है. इसमें कच्चे केलों को एक बंद कमरे में रखकर लकड़ी जलाकर तापमान बढ़ाया जाता है. कभी-कभी हल्दी या अन्य घरेलू उपाय भी इस्तेमाल किए जाते हैं. कमरे को कुछ समय के लिए बंद रखा जाता है. केले धीरे-धीरे और समान रूप से पकते हैं.

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2. केमिकल से पकाया गया केला (सबसे खतरनाक)

यह तरीका आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है और यही सबसे नुकसानदायक भी है. एक कंटेनर में केमिकल घोल तैयार किया जाता है, कच्चे केलों को उसमें डुबोया जाता है, कुछ ही समय में केले हरे से पीले हो जाते हैं.

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Photo Credit: Unsplash

3. रिपेनिंग चैंबर (सबसे सुरक्षित तरीका)

यह एक वैज्ञानिक और मॉडर्न तरीका है. कंट्रोल टेंपरेचर में केले रखे जाते हैं. एथिलीन गैस की मदद से प्राकृतिक तरीके से पकाया जाता है.

10 सेकंड का फॉर्मूला: ऐसे पहचानें केमिकल से पका केला:

1. डंठल (Stem) देखें: अगर केला बाहर से पूरा पीला है लेकिन डंठल हरा है. तो शक करें, ये केमिकल से पका हो सकता है.

2. रंग पर ध्यान दें: बहुत ज्यादा चमकदार और एक जैसा पीला रंग, नेचुरल न लगे तो ये केमिकल से पका हो सकता है.

3. काले धब्बे देखें: नेचुरल केले में छोटे-छोटे काले धब्बे होते हैं, केमिकल वाले में ये धब्बे कम या बिल्कुल नहीं होते.

4. खुशबू से पहचान: प्राकृतिक केला हल्की मीठी खुशबू देता है, केमिकल वाला अक्सर बिना खुशबू या अजीब महक वाला होता है.

5. स्वाद टेस्ट: अगर आपको केले का स्वाद फीका या अजीब लगे, तो समझ जाएं कुछ गड़बड़ है.

6. जल्दी खराब होना: केमिकल वाले केले जल्दी काले पक जाते हैं या जल्दी सड़ते हैं.

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सबसे ज्यादा नुकसानदायक कौन सा?

केमिकल से पकाया गया केला सबसे ज्यादा नुकसान कर सकता है. यह बाहर से आकर्षक दिखता है लेकिन अंदर से अधपका और नुकसानदायक हो सकता है. लगातार ऐसे फल खाने से पेट, पाचन और सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.

सेफ रहने के आसान टिप्स:

  • बहुत ज्यादा चमकदार और एक जैसे केले खरीदने से बचें.
  • हल्के दाग-धब्बों वाले केले ज्यादा नेचुरल होते हैं.
  • स्थानीय या भरोसेमंद विक्रेता से ही खरीदें.
  • मौसम के हिसाब से फल खरीदें.

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