मोटापा आज के समय में लगभग हर व्यक्ति की समस्या बन चुका है. कई लोग वजन कम करने के लिए मीठा छोड़ देते हैं, बाहर का खाना कम कर देते हैं और हेल्दी डाइट फॉलो करते हैं. लेकिन इतना कुछ करने के बाद भी वेट लॉस नहीं हो पाता है. अब, अगर आप भी इन्हीं लोगों में से एक हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. फेमस न्यूट्रिशनिस्ट अपूर्वा अग्रवाल ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है. अपनी इस पोस्ट में न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं, अगर हेल्दी डाइट के बाद भी आप वेट लॉस नहीं कर पा रहे हैं, तो इसके पीछे इंसुलिन रेजिस्टेंस एक कारण हो सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
क्या होता है इंसुलिन रेजिस्टेंस?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो पैनक्रियाज द्वारा प्रोड्यूस किया जाता है. इसका काम खाने से मिलने वाली शुगर को शरीर की सेल्स तक पहुंचाना होता है, ताकि बॉडी को एनर्जी मिल सके. इंसुलिन रेजिस्टेंस तब होता है, जब सेल्स इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं. यानी इंसुलिन मौजूद होने के बावजूद वह ग्लूकोज को पहले की तरह आसानी से सेल्स के अंदर नहीं पहुंचा पाता. इसके बल्ड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ने लगता है.
अब, इस बढ़े हुए लेवल को संभालने के लिए शरीर और ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है. इंसुलिन का लेवल लंबे समय तक ज्यादा रहने पर शरीर फैट को जमा करना शुरू कर देता है और फैट बर्न करने का प्रोसेस धीमा पड़ जाता है. यही वजह है कि हेल्दी डाइट के बाद भी कई लोगों का वजन आसानी से कम नहीं हो पाता.
इंसुलिन रेजिस्टेंस के साइन- अगर आपकी कमर और पेट के आसपास की चर्बी कम नहीं हो रही है
- बार-बार कुछ मीठा खाने का मन होता है
- खाना खाने के कुछ देर बाद ही थकान महसूस होने लगती है या
- बार-बार भूख लगती है, तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है.
इसके अलावा PCOS, एक्ने, बाल झड़ना और हार्मोन से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी इससे जुड़ी हो सकती हैं. न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं, अगर आपको इनमें से दो या तीन लक्षण लगातार नजर आ रहे हैं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
फिर मोटापा कम करने के लिए क्या करें?पोषण विशेषज्ञ के मुताबिक, अगर आप वजन घटाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी रोज की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें. जैसे-
- चीनी और मैदा जैसी रिफाइंड चीजों को कम करें.
- हर मील में सबसे पहले प्रोटीन वाली चीजें जैसे दाल, पनीर, अंडा या दही खाएं. इससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ती और पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है.
- खाना खाने के बाद 10 से 15 मिनट तक वॉक करने की आदत बनाएं.
- साथ ही रोज 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूर लें. अच्छी नींद भी इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है.
1 महीने तक लगातार ऐसा करने से सबसे पहले इंसुलिन स्पाइक होना कम हो जाएगा. इसके बाद-
- जब शरीर धीरे-धीरे बेहतर होने लगे, तब हफ्ते में 3 से 4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करें. इससे मसल्स मजबूत होती हैं और शरीर इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल कर पाता है.
- अपने खाने के बीच 12 से 14 घंटे का गैप रखें.
- अपने मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के लिए जीरा, दालचीनी और एप्पल साइडर विनेगर जैसी चीजों को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करें.
- फिर धीरे-धीरे प्रोटीन इंटेक बढ़ा दें.
- हफ्ते में कम से कम 1 से 2 बार हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज (HIIT) करें.
- स्ट्रेस कंट्रोल करें. इसके लिए कुछ समय धूप में बिताएं और मेडिटेशन करें.
न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं, सही खानपान, नियमित एक्सरसाइज, अच्छी नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. धीरे-धीरे किए गए ये छोटे बदलाव वजन घटाने के साथ-साथ पूरी सेहत को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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