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इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं पीना चाहिए तांबे का पानी, फायदे की जगह हो सकता है नुकसान

Tamrajal Ke Nuksan: आयुर्वेद में ताम्रजल यानि तांबे के जल का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. लेकिन हर किसी के लिए इसका सेवन फायदेमंद नहीं माना जाता है. इस आर्टिकल में जानें किसे नहीं पीना चाहिए ये पानी.

इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं पीना चाहिए तांबे का पानी, फायदे की जगह हो सकता है नुकसान
Tamrajal Side Effects: किन लोगों को तांबे का जल नहीं पीना चाहिए.

शरीर को सेहतमंद रखने के लिए पानी का सेवन कितना जरूरी है, ये तो हम सभी जानते हैं. क्योंकि पानी एक ऐसा पेय पदार्थ है, जिसके सेवन से आधी से ज्यादा बीमारियां खुद-ब-खुद कम हो जाती हैं. बस उसका सही तरीके से इस्तेमाल किया गया हो. आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में 2 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि पानी तभी पीना लाभकारी है जब शरीर को प्राकृतिक तरीके से प्यास लगती है. पानी को स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए तांबे के जल के सेवन को शरीर के लिए लाभकारी बताया गया है, लेकिन क्या सब के लिए तांबे के जल का सेवन लाभकारी है?

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ताम्रजल भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन आयुर्वेद कभी भी किसी चीज को बिना शरीर की प्रवृत्ति को पहचाने थोपता नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि हर द्रव्य का प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति, अवस्था, और समय पर निर्भर करता है. आधुनिक विज्ञान भी यही संकेत देता है कि कुछ स्थितियों में अधिक कॉपर शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है. तांबे का जल उष्ण और तीक्ष्ण स्वभाव वाला होता है और पाचन को बढ़ाने में सहायक है, लेकिन पित्त की वृद्धि भी शरीर में करता है. इसलिए, जरूरी नहीं है कि तांबे का जल हर किसी के लिए लाभकारी हो.

तांबे का जल किसे नहीं पीना चाहिए- (Tamrajal Side Effects)

1. डायबिटीज-

डायबिटीज आज के समय की एक बड़ी समस्या में से एक है. तांबे का जल डायबिटीज से पीड़ित लोगों को नहीं पीना चाहिए.  

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2. पित्त प्रवृत्ति-

जिन लोगों के शरीर की प्रवृत्ति पित्त है. उन्हें भी तांबे के जल से परहेज करना चाहिए. पित्त की प्रवृत्ति बढ़ने से शरीर में गर्मी बढ़ती है और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

3. लिवर-

अगर आप लिवर और किडनी से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तब भी तांबे के जल का सेवन करना लाभकारी नहीं रहेगा. तांबे का जल लिवर और किडनी के काम को प्रभावित करता है, जिससे फिल्टर करने की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है.

4. पाचन-

छोटे बच्चों को भी तांबे का पानी नहीं पीना चाहिए. सुबह खाली पेट तांबे के पानी को पचाने में बहुत मेहनत लगती है और बच्चों की पाचन अग्नि इतनी तेज नहीं होती.

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5. ब्लड शुगर-

विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि शरीर में कॉपर की अधिकता से ब्लड शुगर की मात्रा असंतुलित हो जाती है और ब्लड सेल्स पर भी अत्याधिक जोर पड़ता है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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