चीकू का पौधा घर के गमले में हो या बगीचे में उसकी अच्छी ग्रोथ और फलत के लिए सही खाद देना बेहद जरूरी है. कई बार पौधे पर फूल तो आते हैं, लेकिन वे फल बनने से पहले ही झड़ जाते हैं. वहीं, कुछ पौधों में फल छोटे रह जाते हैं या उनकी संख्या कम होती है. ऐसे में पौधे को सही पोषण देने के साथ उसकी जड़ों और मिट्टी की देखभाल भी जरूरी है. एक चीकू की बागवानी करने वाले एक्सपर्ट ने अपने अनुभव के आधार पर खाद का मिश्रण तैयार करने और उसे पौधे में डालने का तरीका बताया है. आइए जानते हैं चीकू के पौधे की बेहतर ग्रोथ के लिए किन बातों का ध्यान रखें.
तने से दूरी बनाकर करें गुड़ाई
एक्सपर्ट विजय सैनी के अनुसार, खाद डालने से पहले पौधे के चारों तरफ हल्की गुड़ाई करनी चाहिए. इसके लिए तने से करीब 1 से 2 फीट की दूरी बनाए रखें. बहुत पास से गुड़ाई करने पर पौधे की मुख्य और बारीक जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. गुड़ाई करने से मिट्टी ढीली होती है और खाद मिलाने में आसानी रहती है.
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नीम खली, बोन मील और कंपोस्ट का मिश्रण
चीकू के पौधे को पोषण देने के लिए एक्सपर्ट ने नीम खली, बोन मील और कंपोस्ट का मिश्रण इस्तेमाल करने की बात कही है. उनके बताए तरीके में नीम खली और बोन मील की तुलना में कंपोस्ट की मात्रा लगभग दोगुनी रखी जाती है. खाद की सही मात्रा पौधे की उम्र, गमले के आकार और मिट्टी की स्थिति पर निर्भर करती है. इसलिए बिना जरूरत अधिक खााद न डालें.
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खाद को जड़ों के पास नहीं, मिट्टी में मिलाएं
मिश्रण तैयार करने के बाद इसे पौधे के तने से दूरी बनाकर मिट्टी में डालें. इसके बाद हल्की गुड़ाई करके खाद को मिट्टी में मिला सकते हैं. अगर मिट्टी सूखी है तो जरूरत के अनुसार पानी दें. पहले से मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर तुरंत अधिक पाानी देने से बचें.
एनपीके 19:19:19 का करें संतुलित इस्तेमाल
वीडियो में एक्सपर्ट ने पानी में घुलने वाले एनपीके 19:19:19 उर्वरक का भी जिक्र किया है. उन्होंने छोटे पौधों के लिए कम मात्रा से शुरुआत करने और जरूरत के अनुसार पोषण देने की बात कही. हालांकि, एक चम्मच की मात्रा हर पौधे के लिए सुरक्षित या पर्याप्त हो, यह जरूरी नहीं है. उत्पाद के लेबल और विशेषज्ञ की सलााह के अनुसार ही घोल तैयार करें.
फूल और फलों की करें नियमित जांच
पौधे में फूल आने और फल बनने के दौरान मिट्टी की नमी, पत्तियों और तने की जांच करते रहें. फूल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं जैसे पोषक तत्वों की कमी, पानी का असंतुलन, कीट या मौसम का प्रभाव. केवल खाद देने से हर स्थिति में फलत बढ़ने की गारंटी नहीं होती है. सही देखभाल और जरूरत के अनुसाार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.
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