Silk Saree Shopping Tips: शादी हो, पार्टी हो या कोई बड़ा त्योहार, सिल्क का रॉयल लुक हमेशा सबसे अलग दिखता है. हर महिला की अलमारी में आपको सिल्क की साड़ी जरूर देखने को मिल जाएगी. लेकिन दिक्कत तब आती है जब आप हजारों रुपये खर्च करके सिल्क साड़ी लाती हैं और बाद में पता चलता है कि वह तो नकली या 'आर्टिफिशियल सिल्क' है. आजकल मार्केट में असली और नकली सिल्क की पहचान करना काफी मुश्किल हो गया है क्योंकि नकली साड़ियां भी दिखने में उतनी ही चमकदार और सुंदर होती हैं. अगर आप भी सिल्क साड़ी खरीदने का प्लान बना रही हैं, तो तो इन 9 आसान ट्रिक्स से मिनटों में करें असली और नकली सिल्क का फर्क.

असली और नकली सिल्क का फर्क कैसे पता करें- (How to differentiate between real and fake silk)
1. बर्निंग टेस्ट- (Burning Test)
सिल्क की असली पहचान आग से होती है. अब आप पूरी साड़ी तो नहीं जला सकतीं, लेकिन साड़ी के किनारे से एक धागा निकालकर उसे जलाकर देखें. अगर धागा जलने पर 'बालों के जलने' जैसी गंध आए और उसकी राख काली और भुरभुरी (Crushable) हो, तो समझ लीजिए सिल्क असली है. अगर धागा प्लास्टिक की तरह पिघले और गांठ बन जाए, तो वह नकली सिल्क है.
2. हाथ से रगड़कर- (The Rubbing Test)
असली सिल्क को जब आप अपनी हथेलियों के बीच रगड़ेंगी, तो उसमें थोड़ी गर्मी महसूस होगी. असली सिल्क नेचुरल फाइबर होता है, इसलिए रगड़ने पर वह गर्म हो जाता है. वहीं, सिंथेटिक या नकली सिल्क रगड़ने पर बिल्कुल ठंडा रहता है.
3. रिंग टेस्ट- (Ring Test)
यह ट्रिक हल्की सिल्क साड़ियों जैसे 'चिनिया सिल्क' या 'क्रेप सिल्क' पर बहुत काम आती है. अपनी एक उंगली की अंगूठी निकालें और साड़ी को उसके बीच से गुजारें. असली सिल्क इतना सॉफ्ट और लचीला होता है कि वह आसानी से छोटी सी अंगूठी के बीच से निकल जाएगा. नकली सिल्क अक्सर अटक जाता है या मुड़ जाता है.
4. साड़ी की चमक- (Luster)
नकली सिल्क में एक जैसी, सफेद सी चमक होती है. लेकिन असली सिल्क की चमक खास होती है. इसे जब आप अलग-अलग एंगल से देखेंगी, तो इसका रंग हल्का बदलता हुआ सा दिखेगा. यह कुदरती चमक ही असली रेशम की पहचान है.

5. जरी के काम- (brocade work)
सिल्क साड़ियों पर अक्सर जरी का काम होता है. असली जरी में चांदी या सोने के तारों का इस्तेमाल होता है. इसे पहचानने के लिए साड़ी को उल्टा करके देखें. अगर पीछे की तरफ धागे बहुत ज्यादा उभरे हुए या चुभने वाले हैं, तो वह मशीन का काम हो सकता है और सिल्क की क्वालिटी भी हल्की हो सकती है.
6. कीमत- (Price)
सिल्क बनाने में बहुत मेहनत लगती है और रेशम के कीड़ों से धागा तैयार करना एक महंगा प्रोसेस है. अगर कोई आपको बहुत कम दाम (जैसे 1000 या 1500 रुपये) में 'प्योर कांजीवरम' या 'बनारसी सिल्क' दे रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है. क्वालिटी के साथ कीमत भी जुड़ी होती है.
7. टेक्सचर- (Texture Check)
असली सिल्क बहुत ही मुलायम और स्मूथ होता है. इसे हाथ लगाने पर मखमली अहसास होता है. वहीं नकली सिल्क छूने पर थोड़ा कड़ा या प्लास्टिक जैसा महसूस हो सकता है. असली सिल्क को मुट्ठी में भींचने पर उसमें वैसी सिलवटें नहीं पड़तीं जैसी कॉटन या नकली कपड़े में पड़ती हैं.
8. बुनाई की बारीकी- (Weave Pattern)
हाथ से बुनी हुई (Handloom) सिल्क साड़ियों के पीछे की तरफ थोड़ी बहुत असमानता या बुनाई के निशान दिख सकते हैं, जो उनकी खासियत है. मशीन से बनी नकली साड़ियां एकदम परफेक्ट और एक जैसी दिखती हैं, जो अक्सर सिंथेटिक होने का सबूत होती हैं.
9. पानी की बूंद- (Water drop)
एक छोटा सा कोना लेकर उस पर पानी की एक बूंद डालें. असली सिल्क पानी को सोख लेता है, जबकि सिंथेटिक सिल्क पर पानी की बूंद फिसल सकती है या काफी देर तक ऊपर ही टिकी रहती है.
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