E-Zero FIR: वर्तमान में रोजाना लोग ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं. ऐसे अपराधियों पर नकेल कसने और उनके खिलाफ तुरत कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ई-जीरो FIR पहल की गई है. ई-जीरो एफआईआर सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों में लागू होने के बाद देश के किसी कोने में बैठकर पीड़ित साइबर धोखेधड़ी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकता है और उसकी ऑनलाइन रिसीप्ट भी प्राप्त कर पाता है.
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घर बैठे ऑनलाइन धोखेधड़ी की शिकायत दर्ज करा सकते हैं
भारत के नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत वैधानिक मान्यता प्राप्त ई-जीरो एफआईआर गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा तैयार किया गया है. इसके तहत शिकायतकर्ता घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जो स्वतः जीरो एफआईआर में तब्दील हो जाती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू करने के लिए दिए निर्देश
प्रधानमंत्री ने पूरे देश में ई-जीरो FIR लागू करने के दिए निर्देश
गौरतलब है देश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने ई-जीरो एफआईआर को पूरे देश में लागू करने के निर्देश दिए हैं. साइबर फ्रॉड पर नकेल कसने के लिए ई-जीरो एफआईआर की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने इस एकीकृत डिजिटल सिस्टम को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं.
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स्वतः 'ई-जीरो FIR में दर्ज हो जाती हैं 10 लाख से अधिक की शिकायत
वर्तमान नियमों के अनुसार राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायतकर्ता 10 लाख या उससे अधिक की साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज करवा सकता है. ऑनलाइन धोखाधड़ी की राशि तय सीमा से अधिक होने पर सिस्टम स्वतः शिकायत को 'ई-जीरो एफआईआर' के रूप में पंजीकृत कर लेता है और पंजीकृत ई-जीरो एफआईआर की एक डिजिटल प्रमाणित कॉपी शिकायतकर्ता के व्हॉट्सएप या ईमेल पर तुरंत भेज देती है.
ई-जीरो FIR दर्ज होने के 3 दिन के भीतर करानी होता है सत्यापन
ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS ) के जरिए तुरंत संबंधित राज्य या जिले के क्षेत्रीय साइबर थाने को जांच के लिए भेज दी जाती है. कानून के मुताबिक ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के तीन दिन के भीतर शिकायतकर्ता को संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन जाकर अपने बयान सत्यापित कराना होता है, जिसके बाद इसे नियमित एफआईआर में बदल दिया जाता है.
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FIR पंजीकृत कराने के लिए थानों के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति
ई-जीरो का सबसे बड़ा फायदा यह है कि साइबर क्राइम का शिकार हुए पीड़ित को एफआईआर पंजीकृत कराने के लिए थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं, क्योंकि वर्तमान में अधिकार क्षेत्र के चक्कर में एफआईआर थाने में दर्ज नहीं हो पाते हैं, जिससे अपराधी बच निकलते हैं. लेकिन अब केंद्रीयकृत सिस्टम विभिन्न राज्यों की पुलिस, बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बीच की दूरी को खत्म करेगा, क्योंकि साइबर अपराधी एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को ठगते हैं.
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