Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के चलते विवादों में घिरे हैं. विवाद बढ़ा तो उस पोस्ट को हटा भी लिया गया. लेकिन तब तक विवाद बढ़ चुका था और सरमा पर उंगलियां उठने लगी थीं. अपने भाषणों से अक्सर सुर्खियां बटोरने वाले असम के सीएम जितने धारदार बयान देते हैं. पढ़ाई लिखाई के मामले में भी उतने ही आगे रहे हैं. कानून और राजनीतिक विज्ञान की गहरी समझ रखने वाले हिमंत सरमा ने राजनीति को करियर के रूप में चुनने से पहले वकालत को अपना पेशा बनाया.
वकालत से हुई करियर की शुरुआत
हिमंत बिस्वा सरमा का जन्म 1 फरवरी 1969 को असम के जोरहाट में हुआ. शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने गुवाहाटी के प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज (अब कॉटन यूनिवर्सिटी) से पढ़ाई की. छात्र जीवन में ही राजनीति की ओर उनका रुझान बढ़ने लगा था. तब वो कॉटन कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी के रूप में तीन बार चुने गए.
उन्होंने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, गुवाहाटी से एलएलबी किया. साल 1995 में वो सॉलिसिटर बने और 1996 से 2001 तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत की. इस दौरान उन्हें कानून, संविधान और प्रशासनिक प्रक्रिया की प्रेक्टिकल जानकारी भी मिली. जिसने आगे चलकर उनकी राजनीतिक भूमिका को और मजबूत किया.
वकालत से विधानसभा तक
हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हुए हिमंत सरमा आम लोगों की समस्याओं और सरकारी सिस्टम की जमीनी हकीकत से रूबरू हुए. यही अनुभव उन्हें एक्टिव पॉलिटिक्स की ओर ले गया. साल 2001 में उन्होंने पहली बार जलुकबाड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद वो लगातार तीन बार इसी सीट से विधायक चुने गए. तब वो कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ा करते थे. लेकिन साल 2015 में उन्होंने पार्टी बदली और बीजेपी में शामिल हो गए. उसके बाद वो लगातार प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करते रहे और सीएम के पद तक पहुंचे.
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