X, Y, and Z city category kya hai : क्या आपने कभी सोचा है कि सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला मकान किराया भत्ता (HRA) अलग-अलग क्यों होता है? या फिर क्यों कुछ शहरों में रहना बहुत महंगा होता है और कुछ में बहुत सस्ता? दरअसल, भारत सरकार ने देश के शहरों को तीन कैटेगरी में बांटा है- X, Y और Z कैटेगरी. ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते, लेकिन आपकी सैलरी से लेकर आपकी सुख-सुविधाओं तक, सब कुछ इसी पर निर्भर करता है. आइए समझते हैं कैसे-
कैसे तय होती है शहर की कैटेगरी?
किसी शहर को X, Y या Z में रखने का सबसे बड़ा पैमाना वहां की आबादी (Population) है. सरकार समय-समय पर जनगणना के आधार पर इस लिस्ट को अपडेट करती है.
1. 'X' कैटेगरी के शहर (Top Tier)
ये देश के सबसे बड़े और सबसे महंगे शहर होते हैं. इन्हें 'महानगर' भी कहा जा सकता है.
आबादीयहां की जनसंख्या 50 लाख से ज्यादा होती है.
कौन से शहर आते हैं?इसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे जैसे शहर शामिल हैं.
फायदायहां रहने वाले सरकारी कर्मचारियों को सबसे ज्यादा HRA (House Rent Allowance) मिलता है क्योंकि यहां घर का किराया और रहने का खर्च बहुत ज्यादा होता है.
2. 'Y' कैटेगरी के शहर (Middle Tier)
ये वो शहर हैं जो महानगर तो नहीं हैं, लेकिन काफी विकसित हैं.
आबादीयहां की जनसंख्या 5 लाख से 50 लाख के बीच होती है.
कौन से शहर आते हैं?इसमें लखनऊ, जयपुर, पटना, इंदौर, चंडीगढ़ और सूरत जैसे शहर शामिल हैं.
फायदा
यहां खर्च 'X' कैटेगरी से कम होता है, इसलिए यहां मिलने वाले भत्ते भी थोड़े कम होते हैं.
3. 'Z' कैटेगरी के शहर - Lower Tier
जो शहर X और Y कैटेगरी में नहीं आते, उन्हें Z में रखा जाता है.
आबादी
यहां की जनसंख्या 5 लाख से कम होती है.
कौन से शहर आते हैं?छोटे जिले, कस्बे और गांव इसी कैटेगरी का हिस्सा हैं. यहां रहने का खर्च सबसे कम होता है.
आम आदमी पर क्या असर पड़ता है?
सिर्फ सरकारी नौकरी ही नहीं, प्राइवेट कंपनियां भी अपना ऑफिस खोलने और सैलरी पैकेज तय करने से पहले इन कैटेगरी को देखती हैं.
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