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4 फीट की हाइट पर बनता था मजाक, आर्थिक तंगी और तानों के बीच नहीं मानी हार; BPSC पास कर बनीं सहायक निदेशक

श्वेता की जिंदगी की कहानी उन लोगों के लिए प्ररेणादयाक है. जो समाज के तानों से परेशान हो जाते हैं. कम हाइट को श्वेता ने अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया. लोगों की बातों को अनसुना कर अपने लक्ष्य पर फोकस कर उसे पूरा किया.

4 फीट की हाइट पर बनता था मजाक, आर्थिक तंगी और तानों के बीच नहीं मानी हार; BPSC पास कर बनीं सहायक निदेशक
श्वेता की लंबाई करीब चार फीट है. वे दिव्यांग श्रेणी में आती हैं.

तुमसे नहीं होगा, इतनी छोटी हाइट में क्या कर लोगी? शादी भी मुश्किल होगी... ऐसे ताने बिहार के नवादा की श्वेता कौर ने कई बार सुने. लेकिन उन्होंने उपहास को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि सफलता का हथियार बनाया. आज  श्वेता बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 330वीं रैंक हासिल कर सामाजिक सुरक्षा कोषांग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. बहरहाल, 27 वर्षीय श्वेता कौर की कहानी सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रह, आर्थिक कठिनाइयों और आत्मविश्वास की मिसाल है.

मेरी हाइट नहीं, मेरी मेहनत मेरी पहचान है

श्वेता की लंबाई करीब चार फीट है. वे दिव्यांग श्रेणी में आती हैं, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर सामान्य (General) मेरिट में स्थान हासिल किया. श्वेता बताती हैं, "लोग मेरी हाइट का मजाक उड़ाते थे. कई बार कहते थे कि मैं जीवन में कुछ नहीं कर पाऊंगी. यहां तक कि शादी को लेकर भी ताने सुनने पड़ते थे. लेकिन मेरे माता-पिता ने कभी मुझे यह महसूस नहीं होने दिया कि मेरी हाइट मेरी कमजोरी है. उन्होंने हमेशा आत्मविश्वास दिया कि यह कोई अयोग्यता नहीं है." आज वही लोग उनकी सफलता की सराहना कर रहे हैं.

आर्थिक तंगी ने रोका, लेकिन हौसला नहीं छोड़ी

श्वेता की शुरुआती पढ़ाई नवादा के सरस्वती विद्या मंदिर से आठवीं तक हुई. इसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय, नवादा से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की. साल 2015 में इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने बीएचयू की प्रवेश परीक्षा पास कर राजनीति विज्ञान (ऑनर्स) में दाखिला लिया. 2018 में स्नातक पूरा किया. मैट्रिक, इंटर और ग्रेजुएशन—तीनों परीक्षाओं में उन्होंने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए.

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उनका सपना सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली जाने का था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती थी. मजबूरी में उन्हें घर लौटना पड़ा. बाद में उन्होंने बीएचयू से बीएड की प्रवेश परीक्षा भी पास की और 2019-2021 सत्र में बीएड पूरा किया.

घड़ी नहीं, लक्ष्य देखकर की पढ़ाई

BPSC की तैयारी के बारे में श्वेता का तरीका अलग था. वे कहती हैं कि उन्होंने कभी घंटों की गिनती नहीं की. उन्होंने कहा, "मैं समय नहीं, विषय के आधार पर पढ़ाई करती थी. आमतौर पर 8 से 10 घंटे पढ़ती थी, लेकिन कोशिश रहती थी कि जिस टॉपिक को पढ़ूं, उसे पूरी तरह समझूं." उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा (PT) की तैयारी स्वयं की. मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी के लिए धनंजय IAS अकादमी से मार्गदर्शन लिया. हिंदी साहित्य उनका वैकल्पिक विषय था. उनके अनुसार, पीटी में तथ्यात्मक तैयारी (Factual Approach) और मुख्य परीक्षा में विश्लेषणात्मक सोच (Analytical Approach) ने सफलता दिलाई.

गुरु और शिक्षकों को देती हैं सफलता का श्रेय

श्वेता अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ धनंजय IAS अकादमी के धनंजय सर को देती हैं. वह कहती हैं, "उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मेरा मार्गदर्शन किया. उनका योगदान मैं कभी नहीं भूल सकती. "इसके अलावा वे प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय, नवादा के तत्कालीन प्राचार्य सुरेश प्रसाद सिंह को भी याद करती हैं, जिन्होंने छात्र जीवन में उनका आत्मबल बढ़ाया.

साधारण परिवार से असाधारण उपलब्धि

श्वेता बिहार के नवादा जिला मुख्यालय के पंपूकल मोहल्ले की रहने वाली हैं. उनके पिता ओम प्रकाश लाल घर से कपड़े की दुकान चलाते हैं, जबकि मां रेणु देवी गृहिणी हैं. चार बहनों में श्वेता सबसे बड़ी हैं. उनकी बहनें वर्षा कौर, सुरभि राज और वंदना राज अभी पढ़ाई कर रही हैं.

युवाओ के लिए प्रेरणास्रोत बनी है श्वेता

श्वेता का मानना है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और आत्मविश्वास बना रहे तो सफलता जरूर मिलती है. उनकी कहानी यह बताती है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी शारीरिक बनावट, आर्थिक स्थिति या दूसरों की राय से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प से बनती है. नवादा की यह बेटी आज हजारों युवाओं, खासकर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जिन्हें समाज अक्सर कमतर आंकने की कोशिश करता है.

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