Rinku Singh Rahi : भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS को देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी माना जाता है. हर साल लाखों युवा इसका सपना देखते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के एक अधिकारी ने ऐसा फैसला लिया है जिसने सबको चौंका दिया है. 2021 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही अब इस सेवा से इस्तीफा देकर फिर अपने पुराने PCS कैडर में लौटना चाहते हैं. उनका यह कदम सिर्फ एक ट्रांसफर या कैडर बदलने की बात नहीं है, बल्कि सिस्टम के काम करने के तरीके पर भी सवाल खड़े कर रहा है.
क्यों लिया ऐसा फैसलारिंकू सिंह राही ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर IAS सेवा छोड़ने और वापस अपने पुराने PCS कैडर में लौटने की इच्छा जताई है. उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं दी गई. वे पिछले कई महीनों से बिना काम के बैठे थे, जिससे वे बहुत निराश हैं. उनका साफ कहना है कि अगर उन्हें काम नहीं दिया जा रहा, तो उन्हें वापस PCS में भेज दिया जाए जहां वे काम कर सकें.
नियमों के अनुसार, अगर कोई IAS अधिकारी नौकरी शुरू होने के करीब 3 साल के अंदर इस्तीफा देता है, तो उसे कुछ शर्तों पर अपने पुराने कैडर (जैसे PCS) में वापस जाने का मौका मिल सकता है. इसी नियम के आधार पर रिंकू सिंह राही ने अपील की है कि उन्हें IAS छोड़कर फिर से PCS में काम करने दिया जाए.
कौन हैं रिंकू सिंह राहीरिंकू सिंह राही का नाम प्रशासनिक सिस्टम में ईमानदार अफसर के तौर पर जाना जाता है. उन्होंने 2004 में PCS परीक्षा पास की थी और साल 2008 में सोशल वेलफेयर ऑफिसर के रूप में तैनात हुए थे. साल 2009 में उन्होंने स्कॉलरशिप और पेंशन से जुड़े बड़े घोटाले को उजागर किया था. इस खुलासे के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ. बदमाशों ने उन्हें कई गोलियां मारीं, जिससे उनका चेहरा और एक आंख प्रभावित हुई, लेकिन उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी. बाद में उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और IAS बने.
पहले भी रहे चर्चा मेंरिंकू सिंह राही कई बार चर्चा में रह चुके हैं. IAS बनने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग मथुरा में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई. इसके बाद शाहजहांपुर में SDM रहते हुए उन्होंने यहां खुले में पेशाब करने वालों से उठक-बैठक लगवाई. इस मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ा और उन्होंने खुद भी उठक-बैठक लगाई. इसका वीडियो काफी वायरल हुआ था. इस घटना के बाद उन्हें लखनऊ स्थित बोर्ड ऑफ रेवेन्यू से अटैच कर दिया गया. उनका आरोप है कि यहां उन्हें कोई खास काम नहीं दिया गया. उन्होंने यहां तक कहा कि बिना काम के सैलरी लेना उन्हें ठीक नहीं लगता और उन्होंने कुछ समय तक सैलरी लेने से भी इनकार कर दिया.
सिस्टम पर उठे सवालरिंकू सिंह राही का यह फैसला अब सिर्फ एक अफसर की निजी पसंद का मामला नहीं रह गया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईमानदार अफसरों को सिस्टम में सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा? क्या बिना काम के पोस्टिंग देना एक तरह की सजा है? उनके इस कदम ने प्रशासनिक व्यवस्था और उसके काम करने के तरीके पर बहस छेड़ दी है. अब देखना होगा कि सरकार उनके इस अनुरोध पर क्या फैसला लेती है और क्या उन्हें फिर से PCS कैडर में लौटने की अनुमति मिलती है या नहीं.
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