Panic In Silicon Valley: भारतीय इंजीनियर्स और आईटी प्रोफेशनल्स का सपना होता है कि एक दिन वे अमेरिका के सिलिकॉन वैली में काम करें. यही वजह है कि हर साल हजारों भारतीय अच्छी नौकरी, ऊंची सैलरी और वैश्विक अवसरों की तलाश में अमेरिका जाते हैं. लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. हाल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 15,000 भारतीय अमेरिका छोड़कर वापस लौट चुके हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है.
क्यों अमेरिका छोड़ रहे हैं भारतीय
इस बदलाव के पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ी समस्या अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियां और ग्रीन कार्ड का लंबा इंतजार है. अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों को अक्सर सालों तक वर्क वीजा और स्थायी निवास की अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है. एच-1बी वीजा धारकों के लिए नियम लगातार सख्त होते जा रहे हैं, जिससे उनके करियर और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है.
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छंटनी का बड़ा असर देखने को मिल रहा है
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टेक इंडस्ट्री में हाल के वर्षों में छंटनी (Layoffs) भी एक बड़ा कारण बनी है. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और अन्य बड़ी टेक कंपनियों में हजारों कर्मचारियों की नौकरी जाने के बाद विदेशी कर्मचारियों, खासकर वीजा पर काम करने वालों की स्थिति और मुश्किल हो गई है. नौकरी छूटने के बाद सीमित समय में नई नौकरी ढूंढना अनिवार्य होता है, या देश छोड़ना पड़ता है.
भारत का टेक इकोसिस्टम मजबूत हुआ
दूसरी ओर, भारत का टेक इकोसिस्टम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है. बंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे शहर वैश्विक टेक हब के रूप में उभर रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप्स, फिनटेक और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है. इससे भारतीय इंजीनियरों को अपने ही देश में आकर्षक वेतन और बेहतर अवसर मिलने लगे हैं. कई विशेषज्ञों का कहना है कि आज भारत में अच्छी तकनीकी प्रतिभा को पहले की तुलना में कहीं बेहतर करियर विकल्प उपलब्ध हैं.
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सिलिकॉन वैली का आकर्षण अब भी बरकारार
हालांकि, सिलिकॉन वैली का आकर्षण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. आज भी दुनिया की कई सबसे बड़ी टेक कंपनियां वहीं हैं. प्रतिभाशाली लोगों के लिए अमेरिका अब भी अवसर देने वाला देश बना रहेगा, लेकिन पहले की तुलना में वहां बसना और करियर बनाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है.
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