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"IIT से होकर भी यहां?" इंटरव्यू के एक सवाल ने तोड़ दिया IIT ग्रेजुएट का आत्मविश्वास

Viral post : यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और करियर, सफलता, असफलता तथा सामाजिक अपेक्षाओं को लेकर नई बहस को जन्म दे रही है.

"IIT से होकर भी यहां?" इंटरव्यू के एक सवाल ने तोड़ दिया IIT ग्रेजुएट का आत्मविश्वास
IIT टैग का यही वह पहलू है जिसके बारे में कोई आपको नहीं बताता. हां, यह कई दरवाजे खोलता है.

IITian Linkedin Viral Post : हाल ही में एक IIT ग्रेजुएट ने सोशल मीडिया पर अपना ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है कि क्या प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करना मानसिक दबाव का कारण भी बन सकता है. IIT (BHU), वाराणसी से ग्रेजुएट आकाश संपूर्णानंद पांडे वर्तमान में न्यूयॉर्क शहर (अमेरिका) में 'रिपलिंग' (Rippling) कंपनी में सॉफ्टेवयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं आईआईटी होने के कारण उन्हें कैसे एक इंटरव्यू में जज किया गया...

IIT से होकर भी यहां?

आकाश ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने 2019 में 40 हजार मंथली सैलरी वाली एंट्री-लेवल डेटा एनालिस्ट की नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया था. तब  उनसे कहा गया, "अरे, IIT से होने के बावजूद आप यहीं हैं?" यह बात 2019 में कही गई थी, जबकि उन्होंने 2016 में IIT (BHU), वाराणसी से ग्रेजुएशन पूरा किया था.

उस समय उन्होंने हाल ही में UPSC परीक्षा की तैयारी छोड़ने का फैसला लिया था और करियर में एक ब्रेक के बाद दोबारा नौकरी की दुनिया में लौटने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने लिखा कि इंटरव्यू लेने वाले की इस टिप्पणी ने उन्हें "लूजर" जैसा महसूस कराया जिससे उनका आत्मविश्वास बूरी तरह टूट गया था.

IIT टैग की 'छिपी हुई कीमत'

पांडे ने अपनी पोस्ट में आगे इस बात पर जोर दिया कि IIT का टैग कई मौके तो देता है, लेकिन साथ ही यह उम्मीद भी पैदा करता है कि इसे पाने वालों को बिना सवाल उठाए या बेइज्जती सहे "फेल होने का अधिकार" नहीं है. उन्होंने कहा कि IIT टैग का यही वह पहलू है जिसके बारे में कोई आपको नहीं बताता. 

साधारण नौकरियों से शुरू की नई राह

UPSC की तैयारी छोड़ने और करियर में रुकावट आने के बाद आकाश ने हार नहीं मानी. उन्होंने धीरे-धीरे कई साधारण नौकरियों के माध्यम से पेशेवर दुनिया में वापसी की. लगातार प्रयासों और सीखने की प्रक्रिया के बाद उन्होंने टेक्निकल फिल्ड में अपनी जगह बनाई.

आज वे न्यूयॉर्क में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं और उनका कहना है कि उनकी कुल इंकम उन्हें अमेरिका के सबसे अधिक कमाई करने वाले टॉप 2 प्रतिशत लोगों में शामिल करती है.

JEE जीवनभर की गारंटी नहीं

अपनी पोस्ट के अंत में आकाश ने कहा कि JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षा किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी तय नहीं करती. उन्होंने लिखा, "JEE का उद्देश्य कभी भी किसी को जीवनभर की गारंटी देना या उम्रकैद की सजा देना नहीं था."

उनका मानना है कि चाहे कोई IIT से पढ़ा हो या नहीं, किसी एक परीक्षा के परिणाम के आधार पर पूरी जिंदगी का आकलम करना गलत है. उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और करियर, सफलता, असफलता तथा सामाजिक अपेक्षाओं को लेकर नई बहस को जन्म दे रही है.

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