Google-Microsoft Hiring Process: टेक जायंट गूगल (Google) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) जैसी दिग्गज कंपनियों में काम करना हर किसी का सपना होता है. आए दिन जब किसी स्टूडेंट के करोड़ों के पैकेज की खबर आती है, तो ज्यादातर युवाओं के मन में ये सवाल जरूर उठता है कि आखिर इन कंपनियों में जॉब कैसे मिलती है. क्या इसके लिए सिर्फ IIT या IIM का टैग होना ही काफी है या कोई खास क्वॉलिटी और पूरा प्रोसेस काम करता है. आइए जानते हैं ये कंपनियां IIT और IIM के किन छात्रों को चुनती हैं और प्रोसेस क्या होती है.
किन IIT सबसे ज्यादा प्लेसमेंट होता है
- IIT बॉम्बे
- IIT दिल्ली
- IIT कानपुर
- IIT खड़गपुर
- IIT मद्रास
- IIT रुड़की
- IIT गुवाहाटी
- IIT BHU (वाराणसी)
किन IIM से ज्यादा प्लेसमेंट होता है
- IIM अहमदाबाद
- IIM बैंगलोर
- IIM कलकत्ता
- IIM लखनऊ
- IIM कोझिकोड
किन छात्रों पर होती है इन कंपनियों की नजर
1. गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक कंपनियां हर किसी को शॉर्टलिस्ट नहीं करती हैं. वे कुछ खास स्ट्रीम और स्किल्स वाले टैलेंट को ढूंढती हैं.
2. कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस या फिर मैनेजमेंट (MBA) से जुड़े छात्रों की डिमांड यहां सबसे ज्यादा होती है.
3. सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और AI से जुड़े रोल के लिए छात्रों का डाटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम (DSA), प्रोग्रामिंग और कोडिंग स्किल्स बेहद मजबूत होना जरूरी है.
4. ये कंपनियां प्रॉब्लम सॉल्विंग माइंडसेट भी देखती हैं यानी किसी मुश्किल तकनीकी समस्या को कितनी सूझबूझ और अलग तरीके से सॉल्व करते हैं.
5. IIM जैसे आईआईएम अहमदाबाद, बेंगलुरु, कोलकाता से ये कंपनियां मुख्य रूप से प्रोडक्ट मैनेजमेंट, बिजनेस एनालिटिक्स और मार्केटिंग रोल्स के लिए हायरिंग करती हैं.
6. साल 2026 के प्लेसमेंट सीजन में इन दिग्गज कंपनियों ने टॉप संस्थाओं में कुछ छात्रों को 1 करोड़ रुपए से भी अधिक के सालाना पैकेज ऑफर किए हैं.
सेलेक्शन का पूरा प्रोसेस क्या है
1. कैंपस प्लेसमेंट (On-Campus)
- ज्यादातर सेलेक्शन कॉलेज के आखिरी साल में यानी सितंबर से दिसंबर के बीच प्लेसमेंट सेल के जरिए होती हैं.
- सबसे पहले छात्रों के रेज्यूमे देखे जाते हैं. इसमें अच्छा कॉलेज ग्रेड (CGPA), मजबूत एकेडमिक रिकॉर्ड और कॉलेज के दौरान किए गए बड़े प्रोजेक्ट्स काफी मायने रखते हैं.
- शॉर्टलिस्ट हुए छात्रों को Hacker Rank जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऑनलाइन कोडिंग टेस्ट देना होता है. इसमें मुख्य रूप से DSA पर बेस्ड 2 से 3 राउंड होते हैं.
- कोडिंग टेस्ट पास करने के बाद 3 से 5 राउंड के कड़े टेक्निकल इंटरव्यू होते हैं. यहां टीम लीडर्स या मैनेजर्स सीधे आपकी कोडिंग एबिलिटी को परखते हैं.
- आखिर में HR और बिहेवियरल राउंड होता है, जिसमें यह देखा जाता है कि छात्र कंपनी के कल्चर और माहौल में खुद को ढाल पाएगा या नहीं.
2. इंटर्नशिप के जरिए (PPO)
तीसरे या चौथे साल में जो छात्र गूगल या माइक्रोसॉफ्ट में 10-12 हफ्तों की इंटर्नशिप करते हैं, उनके पास डायरेक्ट नौकरी पाने का सबसे अच्छा मौका होता है. अगर इंटर्नशिप के दौरान आपका काम शानदार रहा, तो कंपनी बिना किसी फाइनल प्लेसमेंट राउंड के सीधे प्री-प्लेसमेंट ऑफर (PPO) दे देती है.
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