बिहार लोकसेवा आयोग की 70वीं संयुक्त परीक्षा के परिणाम (BPSC Result) में पूर्णिया के रवि कुमार राहुल ने सफलता पाई है. रवि का चयन ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) के पद पर हुआ है. रवि के इस सफलता में उनकी जीवन साथी रितु ने बड़ी अहम भूमिका निभाई. पढ़ाई के दौरान ही रितु से दोस्ती हुई और धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. इसके बाद दोनों ने शादी कर ली. रवि जब निराश हुए पत्नी रितु ने हौसलाफजाई की और अब वह BPSC परीक्षा पास करके अधिकारी बन गए. रवि का परिवार निम्न मध्य वर्गीय है. रवि के दादा मणि लाल सहनी सामाजिक कार्यकर्ता थे और एक राजनीतिक दल से भी जुड़े हुए थे.
पिता किसान तो मां आंगनबाड़ी सेविका
पिता अर्जुन सहनी किसान हैं. मां अनिता देवी ने आंगनवाड़ी सेविका हैं. उनके दादा जी का निधन हो चुका है. रवि के दादा ने हमेशा रवि को सिविल सेवा का अधिकारी बनने के लिए प्रेरित किया. रवि NDTV से बातचीत में कहते हैं कि मेरी यह सफलता दादा जी को समर्पित है. वे आज अगर जिंदा होते तो उन्हें सबसे अधिक खुशी होती. रवि ने नवोदय विद्यालय से वर्ष 2007 में मैट्रिक और वर्ष 2009 में डीएवी, रांची से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. उसके बाद बेंगलुरु के ग्लोबल अकादमी ऑफ टेक्नोलॉजी से इलोक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन से इंजिनीरिंग की. इसेक बाद सिविल सर्विस की तैयारी के लिए पटना आ गए.
पटना के तैयारी के दौरान हुआ प्यार
पटना में सिविल सर्विस की तैयारी के दौरान रवि की मुलाकात रितु से हुई जो खुद लोकसेवा के साथ-साथ बैंकिंग की तैयारी कर रही थी. दोनों की मित्रता प्यार में तब्दील हो गई. जब सिविल सर्विस में काफी समय तक सफलता हाथ नहीं लगी तो रवि ने रेलवे की भर्ती परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और वर्ष 2018 में स्टेशन मास्टर बन गए. ठीक उसी दौरान रितु को भी इंडियन बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर की नौकरी मिल गई. इसके बाद दोनों ने परिजनों की मर्जी से शादी रचा ली.

रवि कुमार राहुल बने ग्रामीण विकास पदाधिकारी
पहले से BPSC पास पत्नी बनी गुरू
रेलवे की नौकरी के साथ-साथ रवि की सिविल सर्विस की तैयारी की राह में बाधाएं भी आ खड़ी हुई. रेलवे में शिफ्ट-ड्यूटी होती है, जहां कभी दिन तो कभी रात में ड्यूटी करनी होती है. इसकी वजह से रवि नियमित रूप से पढ़ाई नही कर पाता था. लेकिन इस समस्या के समाधान में जीवन-संगिनी रितु की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने पथ-प्रदर्शक के साथ-साथ गुरु की भी भूमिका का निर्वहन किया. रवि कहते हैं कि चूंकि रितु मुझसे पहले BPSC में सफल हो चुकी थीं तो वह तैयारी की बारीकियों से बखूबी परिचित थीं.
उसने गाइड की तरह मेरी मदद की. मुझे क्या और कितना पढ़ना है, वही तय करती थीं. मुझे केवल नींद से समझौता करना पड़ा और मेरी राह आसान हो गई. अपनी तैयारी से जुड़ी रणनीति को साझा करते हुए रवि कहते हैं कि घण्टे की बजाय टारगेट-बेस्ड तैयारी किया. कभी किसी कोचिंग की बजाय सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया. वे कहते हैं, "सतत प्रयास से सफलता मिलती है, सफलता का कोई शार्ट-कट नही होता है."
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