Bihar News: बिहार के बेगूसराय में इन दिनों खुशियों का माहौल है। 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा के परिणाम ने जिले का मान पूरे देश में बढ़ा दिया है। वहीं जिले इन तीन युवाओं की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की है जो घोर अंधकार में भी उम्मीद की किरण ढूंढ लेता है. बीपीएससी के नतीजों में जब इन तीनों का नाम आया तो सिर्फ उनके घरों में ही नहीं बल्कि पूरे जिले में एक गर्व की लहर दौड़ गई. यह परिणाम उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए सबक है जो संसाधनों की कमी और आर्थिक तंगी के कारण अक्सर हार मान लेते हैं.
ताड़ी बेचने वाले का बेटा बना ऑफिसर
नावकोठी के सूरज कुमार की कहानी किसी संघर्षशील फिल्म जैसी है. जिनके पिता रामचंद्र चौधरी ने ताड़ी उतारकर परिवार का पेट पाला, उसी बेटे ने आज SDM बनकर उनके सिर को गर्व से ऊंचा कर दिया है. इंजीनियरिंग करने के बाद सूरज ने जब प्रशासनिक सेवा की राह चुनी तो चार बार असफलताएं मिलीं. ताने मिले और आर्थिक मजबूरियां भी रास्ते में आईं, लेकिन सूरज ने अपनी जिद्द नहीं छोड़ी. पांचवें प्रयास में मिली कामयाबी ने उनके पिता के वर्षों के उस त्याग को अमर कर दिया जिसे लोग शायद कभी समझ नहीं पाते.
बिजली मिस्त्री का बेटा बना SDM
बीहट के प्रिंस कुमार की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो यह सोचते हैं कि सीमित संसाधनों में बड़े लक्ष्य हासिल नहीं होते. टेंट-पंडाल में बिजली का काम करने वाले पिता बालेश्वर रजक ने हर हाल में बेटे की पढ़ाई जारी रखी. आईआईटी कानपुर से उच्च शिक्षा लेने के बाद प्रिंस का एकमात्र सपना जनसेवा करना था. जब प्रिंस SDM बनकर गांव लौटे तो उन फूलों की मालाओं में सिर्फ उनकी मेहनत नहीं, बल्कि उनके पिता के उन पसीने की बूंदों की चमक थी जो उन्होंने पंडालों में काम करते हुए बहाई थी.
मां ने गाय पालकर पढ़ाया
खोदावंदपुर के राजू कुमार का संघर्ष तो रोंगटे खड़े कर देने वाला है. मैट्रिक के समय पिता का साथ छूटा तो घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. मां रेखा देवी ने गाय पालकर और भाई ने मजदूरी करके राजू को टूटने नहीं दिया. राजू ने रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी की, जहां दिन भर की थकान के बाद भी उनके पास केवल सपने थे. वे ड्यूटी के दौरान पीडीएफ और छोटे नोट्स से पढ़ाई करते रहे. उनकी यह तपस्या रंग लाई और आज वह डीएसपी बनकर वर्दी में अपनी मां के सपनों को पूरा करने जा रहे हैं.
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