उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली, 1983 के नियम 8 में संशोधन को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वो जल्द से जल्द नियम 8 में संशोधन का प्रस्ताव लाकर टीईटी को अनिवार्य योग्यता में शामिल करे. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को 28 जुलाई, 2025 को जारी एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक/प्रशिक्षित स्नातक) भर्ती विज्ञापन के संबंध में शुद्धिपत्र (Corrigendum)
जारी करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही स्पष्ट किया कि ये भर्ती प्रक्रिया केवल कक्षा 9 और 10 के शिक्षकों के लिए लागू होगी न कि जूनियर कक्षाओं (6 से 8) के लिए.
कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार किया और मामले को निस्तारित करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ताओं ने इस चूक को उजागर किया है कि 28 जुलाई, 2025 की भर्ती सूचना में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भर्ती किए जाने वाले शिक्षकों की जरूरत किन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए है और नियम 8 में एक कमी नज़र आती है.
कोर्ट ने निर्देश दिया कि नियम 8 में पहले से बताई गई योग्यताओं के अलावा एक और जरूरी योग्यता TET (पास) जोड़ी जाए. कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि वह एक शुद्धिपत्र जारी करे जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि यह विज्ञापन कक्षा IX और X के शिक्षकों की भर्ती से संबंधित है जिसपर सरकार द्वारा आवश्यक निर्देश जारी किया जाएगा.
क्या है पूरा मामला
यह आदेश जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस प्रशांत कुमार की डिविजन बेंच ने जौनपुर के अखिलेश व तीन अन्य सहित जयहिंद यादव व अन्य द्वारा दाखिल दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है. दरअसल दोनों याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शैक्षिक (प्रशिक्षित स्नातक ग्रेड) सेवा नियमावली, 1983 के नियम 8 को रद्द करने की मांग की थी. याचिका में कहा गया कि यह नियम 30 जनवरी 2025 के छठे संशोधन द्वारा संशोधित किया गया था और यह राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के विपरीत है.
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह अधिसूचना कक्षा VI से VIII तक पढ़ाने के लिए 'सहायक अध्यापक' के पद पर नियुक्ति के लिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) पास करना अनिवार्य बनाती है. याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि आपत्तिजनक नियम 8 को 'अल्ट्रा वायर्स' घोषित किया जाए. याचिका में इस नियमावली के तहत भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 28 जुलाई, 2025 को जारी किए गए विज्ञापन को रद्द करने की मांग की गई. याचिकाकर्ताओं की ओर से तरफ से अधिवक्ता तानिया पांडे अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने पक्ष रखा था.
अधिवक्ता तान्या पांडे ने कोर्ट को बताया कि 31 मार्च, 2010 के नोटिफिकेशन से जिसे अथॉरिटी ने 5 अप्रैल, 2010 को गजट ऑफ़ इंडिया एक्स्ट्राऑर्डिनरी में पब्लिश किया था, उसमें NCTE को बच्चों के मुफ़्त और ज़रूरी शिक्षा के अधिकार एक्ट, 2009 के सेक्शन 23 के सब-सेक्शन (1) के तहत यह अधिकार दिया गया था कि वह एकेडमिक अथॉरिटी के तौर पर किसी व्यक्ति के टीचर के तौर पर अपॉइंटमेंट के लिए ज़रूरी मिनिमम क्वालिफिकेशन तय कर सके.
प्रतिवादियों के मिले जवाब से यह कन्फर्मेशन मिला कि यह एक्ट क्लास VIII तक पढ़ाने वाले टीचरों पर लागू होता है. कोर्ट में जानकारी दी गई कि इस समय प्रदेश में 1488 सरकारी हाईस्कूल है जहाँ सिर्फ क्लास IX और X पढ़ाई जाती है. इसके अलावा 70 इंटरमीडिएट कॉलेज हैं जहां सिर्फ़ क्लास IX से XII पढ़ाई जाती है और सिर्फ़ 904 इंस्टीट्यूशन हैं, जहां क्लास VI से XII पढ़ाई जाती है. अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने अधिवक्ता तान्या पांडे की दलीलों को सही माना और कोर्ट से विज्ञापन को रद्द करने के लिए निर्देश देने की मांग की.
नियमों में दो बदलाव किए गए
वहीं सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन और स्टैंडिंग काउंसिल सौरभ प्रतिवादी नंबर एक से तीन की ओर से पेश हुए. अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि NCTE ने 12 नवंबर, 2014 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था. जिसमें क्लास IX और X में टीचरों की भर्ती के लिए एजुकेशनल क्वालिफिकेशन ज़रूरी की गई थी. इसके बाद नियमों में दो बदलाव किए गए. पहला साल 2016 में था जिसमें बैचलर डिग्री और BEd या उसके बराबर की एक्स्ट्रा ज़रूरत जोड़ी गई थी और दूसरा साल 2025 में क्लैरिफिकेशन के तौर पर था जिसमें 'ग्रेजुएशन डिग्री' शब्द भी शामिल था.
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष कोर्ट में यह साबित करने में नाकाम रहा कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया एनसीटीई द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रही है. कोर्ट ने इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि शिक्षा के अपर निदेशक द्वारा दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया गया है कि प्रदेश में 904 ऐसे संस्थान हैं जहां कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की शिक्षा प्रदान की जाती है. ऐसे में लोक सेवा आयोग का यह दावा कि कक्षा 6 से 8 तक के पदों पर कोई पद नहीं है. कोर्ट ने 28 जुलाई, 2025 को जारी विज्ञापन में कक्षाओं का स्पष्ट उल्लेख न होने को गंभीर त्रुटि माना. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को तत्काल प्रभाव से संशोधित विज्ञापन (कॉरिजेंडम) जारी करने का निर्देश दिया गया है. जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि वर्तमान भर्ती केवल कक्षा 9 और 10 के लिए है.
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