- ED ने PACL मामले में 455 अचल संपत्तियों की वापसी प्रक्रिया शुरू की है जिनकी कीमत लगभग 15000 करोड़ रुपये है
- अटैच हुई संपत्तियां इस वित्तीय वर्ष में 26000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई हैं जो भारत और विदेशों में फैली हैं
- PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों पर लाखों निवेशकों से ठगी करने का आरोप है
देश के सबसे बड़े चिटफंड घोटालों में से एक PACL मामले में अब एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 455 अचल संपत्तियों को वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनकी बाजार में मौजूदा कीमत करीब 15,582 करोड़ रुपये बताई जा रही है. यह फैसला PMLA कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है और इन संपत्तियों को जस्टिस आर.एम. लोढ़ा कमेटी को सौंपा जाएगा, ताकि इन्हें बेचकर ठगे गए लाखों निवेशकों को उनका पैसा वापस दिया जा सके.
ED के मुताबिक, सिर्फ इस वित्तीय वर्ष में ही करीब 26,324 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जिससे इस पूरे PACL केस में अब तक कुल अटैचमेंट 27,030 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. ये संपत्तियां भारत ही नहीं बल्कि विदेशों, जैसे ऑस्ट्रेलिया तक में फैली हुई हैं. जांच में सामने आया कि ये संपत्तियां PACL लिमिटेड, उसकी सहयोगी कंपनियों और दिवंगत निर्मल सिंह भंगू के परिवार के नाम पर थीं. इसमें उनकी बेटी बारिंदर कौर, सुखविंदर कौर, दामाद हरसतिंदर पाल सिंह हायर, गुरपर्ताप सिंह और पत्नी प्रेम कौर जैसे नाम शामिल हैं.
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क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला CBI की FIR से शुरू हुआ था, जिसमें PACL और PGF लिमिटेड पर लाखों लोगों से ठगी करने का आरोप लगा. जांच में खुलासा हुआ कि निर्मल सिंह भंगू और उनके साथियों ने एक अवैध निवेश योजना चलाई, जिसके जरिए पूरे देश से करीब 68,000 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए. लोगों को जमीन देने के नाम पर नकद और किश्तों में पैसा लिया गया, लेकिन ज्यादातर मामलों में जमीन का कोई असली मालिकाना हक ही नहीं था. फर्जी एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अलॉटमेंट लेटर के जरिए लोगों को गुमराह किया गया. आज भी करीब 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं मिल पाया है.
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ED क्यों दे रही है संपत्ति?
सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को इस मामले में बड़ा फैसला देते हुए सेबी को निर्देश दिया था कि वह जस्टिस लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाए. इस कमेटी का काम PACL की संपत्तियों को बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाना है. उसी के तहत अब ED की ये कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है.
ED की जांच में यह भी सामने आया कि ठगी का पैसा अलग-अलग कंपनियों और लोगों के जरिए घुमाकर छिपाया गया और फिर उससे देश-विदेश में संपत्तियां खरीदी गईं. इस मामले में ED ने 2018 में चार्जशीट भी दाखिल की थी और कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. हरसतिंदर पाल सिंह हायर को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बारिंदर कौर और प्रेम कौर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हैं. वहीं सुखविंदर कौर और गुरपर्ताप सिंह के खिलाफ फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर की कार्रवाई भी शुरू की गई है.
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घोटाले की जांच अभी भी जारी
अब PMLA कोर्ट के आदेश के बाद 455 संपत्तियों को लोढ़ा कमेटी को सौंपना इस पूरे केस में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है. इससे उम्मीद जगी है कि लंबे समय से अपने पैसे का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों को जल्द राहत मिल सकती है. ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और बाकी बची संपत्तियों और पैसों का पता लगाकर उन्हें भी वापस दिलाने की कोशिश की जा रही है.














