Low Carb vs Low Fat: आजकल जब भी दिल की सेहत की बात होती है तो सबसे पहले दो शब्द सुनाई देते हैं लो-कार्ब और लो-फैट. कोई कहता है चावल और रोटी छोड़ दो, तो कोई कहता है घी-तेल कम कर दो. लेकिन क्या सच में सिर्फ कार्बोहाइड्रेट या फैट कम कर देना ही हार्ट को हेल्दी रखने का तरीका है? हाल ही में एक बड़ी और लंबी रिसर्च ने इस बहस को नई दिशा दे दी है. लगभग 2 लाख पुरुषों और महिलाओं पर करीब 30 साल तक चली इस स्टडी ने बताया कि दिल की सेहत का असली राज कार्ब या फैट की मात्रा नहीं, बल्कि खाने की क्वालिटी है. यानी आप क्या खा रहे हैं, यह ज्यादा मायने रखता है, कितना कार्ब या कितना फैट, यह उससे कम अहम है.
यह शोध अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ शोधकर्ताओं ने किया और इसे जर्नल ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित किया गया.
क्या थी इस स्टडी की खास बात?
इस अध्ययन में करीब 2 लाख हेल्थ प्रोफेशनल्स के खान-पान और सेहत का 30 साल तक रिकॉर्ड रखा गया. कुल मिलाकर यह 52 लाख से ज्यादा पर्सन-ईयर्स का डेटा था, जो इसे बेहद मजबूत और भरोसेमंद बनाता है.
शोधकर्ताओं ने पाया कि सभी लो-कार्ब डाइट समान नहीं होतीं. सभी लो-फैट डाइट भी समान रूप से फायदेमंद नहीं होतीं. असली फर्क पड़ता है खाने की क्वालिटी से. अगर किसी की डाइट में प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा रेड मीट, रिफाइंड कार्ब्स और ट्रांस फैट ज्यादा थे, तो भले ही वह लो-कार्ब या लो-फैट कहलाती हो, दिल के लिए उतनी लाभदायक नहीं थी.
दिल के लिए क्या है अच्छी क्वालिटी की डाइट?
शोध के अनुसार, जिन लोगों ने संतुलित और पोषण से भरपूर डाइट ली उनमें गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का लेवल ज्यादा था. खराब फैट और सूजन (इंफ्लेमेशन) के मार्कर कम थे. कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा कम था.
अच्छी डाइट में शामिल थे:
- हरी सब्जियां
- मौसमी फल
- साबुत अनाज (जैसे ओट्स, ब्राउन राइस)
- हेल्दी फैट (जैसे नट्स, बीज, ऑलिव ऑयल)
- पर्याप्त प्रोटीन
यानी दिल को हेल्दी रखने के लिए जरूरी है कि आपकी प्लेट रंग-बिरंगी और बैलेंस हो.
तो क्या कार्ब्स बुरे नहीं हैं?
यह स्टडी बताती है कि सभी कार्ब्स बुरे नहीं होते. रिफाइंड कार्ब्स (जैसे मैदा, व्हाइट ब्रेड, मीठे स्नैक्स) नुकसानदेह हो सकते हैं, लेकिन साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर कार्ब्स शरीर के लिए जरूरी हैं.
इसी तरह, सभी फैट भी खराब नहीं होते. ट्रांस फैट और अत्यधिक सैचुरेटेड फैट हानिकारक हैं, लेकिन हेल्दी फैट (जैसे बादाम, अखरोट, मूंगफली, अलसी) दिल के लिए फायदेमंद होते हैं.
कोरोनरी हार्ट डिजीज क्या है? | What is Coronary Heart Disease?
कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) दिल की सबसे आम बीमारी है और हार्ट अटैक का प्रमुख कारण मानी जाती है. इसमें दिल की धमनियों में प्लाक जमा हो जाता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है. इस स्टडी में पाया गया कि जो लोग बैलेंस और पौष्टिक डाइट लेते थे, उनमें CHD का खतरा काफी कम था.
एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
शोध का नेतृत्व करने वाले महामारी विशेषज्ञ झीयुआन वू ने कहा कि केवल न्यूट्रिएंट की मात्रा पर ध्यान देने से फायदा नहीं होगा, जब तक कि भोजन की क्वालिटी अच्छी न हो. इसी जर्नल के एडिटर और येल यूनिवर्सिटी के कार्डियोलॉजिस्ट हार्लन क्रमहोल्ज़ ने कहा कि यह शोध लो-कार्ब बनाम लो-फैट की पुरानी बहस को पीछे छोड़ता है और बताता है कि असली फर्क खाने की क्वालिटी से पड़ता है.
क्या सख्त डाइट जरूरी है?
यह शोध बताता है कि कैलोरी, कार्ब या फैट गिनने की सख्त जरूरत नहीं है. जरूरी है प्रोसेस्ड फूड कम करें, प्राकृतिक और ताजा भोजन ज्यादा लें, प्लेट में बैलेंस रखें यानी डाइटिंग से ज्यादा जरूरी है स्मार्ट ईटिंग.
भारतीय संदर्भ में क्या करें?
हमारे यहां अक्सर या तो पूरी तरह घी-तेल बंद कर दिया जाता है या फिर रोटी-चावल को दोषी ठहरा दिया जाता है. लेकिन असल में जरूरत है:
- सफेद चावल की जगह कभी-कभी ब्राउन राइस
- मैदे की जगह मल्टीग्रेन आटा
- तली चीजों की जगह भाप या उबली सब्जियां
- रोजाना एक कटोरी सलाद
इस अध्ययन ने साफ कर दिया है कि दिल की सेहत के लिए सिर्फ कार्ब या फैट कम करना काफी नहीं है. असली महत्व है खाने की क्वालिटी का.
- ज्यादा सब्जियां
- साबुत अनाज
- हेल्दी फैट
- कम प्रोसेस्ड फूड
यही है असली हार्ट-फ्रेंडली डाइट. तो अगली बार जब कोई कहे कार्ब छोड़ दो या फैट बंद कर दो, तो याद रखिए आपका दिल मात्रा नहीं, क्वालिटी को पहचानता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














