Pradosh Vrat 2026: हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व होता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है. साथ ही समस्याओं से भी छुटकारा भी मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत और पूजा करने से भोलेनाथ मनोकामनाएं पूर्ण होते हैं. पंचांग के अनुसार कार्तिक का महीना शुरू हो गया है और दिवाली का पर्व भी कुछ ही दिनों में मनाया जाएगा. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दीपावली से पहले प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा. आइए जानते हैं सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि.
कब है प्रदोष व्रत?
हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 6 नवंबर दिन शुक्रवार को रखा जाएगा.
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क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है. 6 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा. इस अवधि में आप भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं.
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
- इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान शिव की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें.
- सबसे पहले शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें.
- इसके बाद भगवान शिव को चंदन लगाएं और बेलपत्र, फूल तथा धतूरा अर्पित करें.
- पूजा में शक्कर और घी से बनी मिठाई का भोग भी लगाना शुभ माना जाता है.
- इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें.
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने के बाद घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें.
- दिनभर उपवास रखते हुए मन में भगवान शिव का स्मरण करते रहें.
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