सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. पितृपक्ष 16 दिनों तक चलता है. इस दौरान पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे. पितृपक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा जताने का खास समय माना जाता है. इस साल पितृपक्ष की शुरुआत आज शनिवार, 26 सितंबर से हो रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि पितृपक्ष में श्राद्ध के नियम और तर्पण का शुभ मुहूर्त क्या है?
श्राद्ध के नियम
पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध निकाला जाता है. मान्यता है कि इस दौरान पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. शास्त्रों के अनुसार, पिंडदान और तर्पण हमेशा दोपहर के समय ही करना सबसे अच्छा समय माना जाता है.
पितृपक्ष में श्राद्ध के कुछ नियम भी होते हैं. इस दौरान खानपान से लेकर कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए. पितृपक्ष 16 दिनों तक चलता है और इस दौरान लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा नए कपड़े या किसी भी प्रकार कीमती वस्तुएं व आभूषण नहीं खरीदने चाहिए.
श्राद्ध और तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त
- सुबह के समय 11:53 से दोपहर 12:43 के बीच
- दोपहर में 01:00 बजे से दोपहर 03:30 बजे तक
पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण विधि
अगर, आपने पितरों का श्राद्ध निकाल रहे हैं तो आपको कुश, काले तिल, जल, जौ और फूल का उपयोग करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करना चाहिए. इसके साथ ही पितरों के लिए जो खाना बनाया जाता है उसे गाय, कुत्ते, कौवे और चींटी के लिए जरूर निकालना चाहिए.
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