दिवाली से पहले मनाया जाने वाला धनतेरस का त्योहार धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने, सोना-चांदी और बर्तन खरीदने के साथ दीपदान करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. उन्हें आरोग्य और चिकित्सा का देवता माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर पूजा के साथ अकाल मृत्यु से बचाव के लिए दीपदान करने की परंपरा क्यों जुड़ी है. आइए आचार्य मदनमोहन से जानते हैं समुद्र मंथन और राजा के पुत्र से जुड़ी पौराणिक कथा.
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की क्यों की जाती है पूजा?
आचार्य मदनमोहन ने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसी वजह से इस दिन को धनतेरस कहा जााता है. भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंश और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है. उनके प्राकट्य दिवस पर लोग अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से उनकी पूजा करते हैं. धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा भी अमृत कलश से जुड़ी मानी जाती है. वहीं, इस दिन सोना-चांदी और दूसरी वस्तुएं खरीदनाा शुभ माना जाता है. हालांकि, खरीदारी को लेकर अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग परंपराएं प्रचलित हैं.
धनतेरस की क्या है पौराणिक कथा
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि एक बार यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि क्या किसी मनुष्य के प्राण लेते समय उन्हें कभी दया आती है. इस पर एक यमदूत ने राजा हेमा के पुत्र की कहानी सुनाई. कथा के अनुसार, राजा हेमा के पुत्र की कुंडली देखककर ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह के चार दिन बाद उसकी मृत्यु हो जााएगी. राजा ने बेटे को यमुना किनारे एक गुफा में रखवाया, ताकि वह स्त्रियों के संपर्क में न आए. लेकिन संयोग से राजा हंस की पुत्री वहां पहुंची और राजकुमार से उसका गंधर्व विवाह हो गया. भविष्यवाणी के अनुसार, विवाह के चौथे दिन राजकुमार की मृत्यु हो गई. नवविवाहिता का विलाप सुनकर यमदूत का हृदय भी द्रवित हो उठा. तब यमराज ने बताया कि धनतेरस पर विधिपूर्वक दीपदाान करने की मान्यता अकाल मृत्यु से रक्षा से जुड़ी है.
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धनतेरस पर दीपदान का क्या है महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है. इसे यम दीपदान भी कहा जााता है. मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों की सुख-शांति और दीर्घायु की कामना की जाती है. श्रद्धालु घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखते हैं. हालांकि, ये धार्मिक आस्था और पौराणिक कथाओं से जुड़ी मान्यताएं हैं. इन्हें अकाल मृत्यु रोकने की वैज्ञानिक गारंटी नहीं माना जााना चाहिए. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ स्वास्थ्य, सुरक्षा और परिवाार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है.
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