विज्ञापन

सनातन धर्म का संदेश लेकर निकलेंगे मुरारी बापू, कन्याकुमारी से केदारनाथ तक निकलेगी भारत स्वास्तिक यात्रा

भारत की आध्यात्मिक परंपरा, सनातन धर्म और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर प्रसिद्ध रामकथा वाचक मुरारी बापू एक विशेष धार्मिक यात्रा पर निकलने जा रहे हैं. इस यात्रा का नाम 'भारत स्वास्तिक यात्रा' रखा गया है.

सनातन धर्म का संदेश लेकर निकलेंगे मुरारी बापू, कन्याकुमारी से केदारनाथ तक निकलेगी भारत स्वास्तिक यात्रा
कन्याकुमारी से केदारनाथ तक निकलेगी मुरारी बापू की भारत स्वास्तिक यात्रा
File Photo

प्रसिद्ध कथावाचक और रामचरितमानस के मर्मज्ञ मुरारी बापू भारत के चारों कोनों को धर्म और आस्था के धागे से जोड़ने के लिए एक खास यात्रा पर निकलने जा रहे हैं. इस यात्रा का नाम है 'भारत स्वास्तिक यात्रा'. यात्रा का उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद धार्मिक स्थलों को जोड़ना और लोगों के बीच धर्म, प्रेम, शांति और एकता का संदेश पहुंचाना है. भारत स्वास्तिक यात्रा दो चरणों में होगी. पहला चरण कन्याकुमारी से केदारनाथ तक और दूसरा द्वारका से जगन्नाथ पुरी तक जाएगा.

कन्याकुमारी से शुरू होगी यात्रा

भारत स्वास्तिक यात्रा का पहला चरण 10 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक चलेगा. इसकी शुरुआत तमिलनाडु के कन्याकुमारी से होगी और समापन उत्तराखंड के केदारनाथ में होगा. कन्याकुमारी में होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम में श्रृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य भी शामिल होंगे.

यात्रा के दौरान श्रद्धालु कई बड़े धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों से गुजरेंगे. जैसे कलाडी, श्रृंगेरी, हम्पी, तुलजापुर, ओंकारेश्वर, झांसी, मथुरा, कुरुक्षेत्र, अटारी-वाघा और जम्मू. इससे श्रद्धालुओं को देश की अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा.

द्वारका से जगन्नाथ पुरी तक दूसरा चरण

यात्रा का दूसरा चरण 14 नवंबर से 22 नवंबर 2026 तक चलेगा. इसकी शुरुआत गुजरात के द्वारका से होगी और यात्रा ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में पूरी होगी.

इस दौरान श्रद्धालु सोमनाथ, डाकोर, उज्जैन, नागपुर, चंपारण, मायापुर और कोलकाता जैसे प्रमुख स्थानों से गुजरेंगे. इस तरह दोनों चरणों में यात्रा देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ते हुए 9000 किलोमीटर से ज्यादा तक की दूरी तय करेगी.

स्वास्तिक यात्रा का महत्व

हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शुभता प्रतीक माना जाता है. किसी भी पूजा-पाठ या शुभ कामों की शुरुआत में भी स्वस्तिक बनाया जाता है. स्वास्तिक शब्द संस्कृत के 'स्वस्ति' से निकला है, जिसका अर्थ है सुख, कल्याण और मंगल.

मुरारी बापू के अनुसार, इस यात्रा में 'दिव्य भारत, सेव्य भारत, भव्य भारत और नव्य भारत' स्वास्तिक की चार भुजाओं का प्रतीक होंगे. इसके साथ ही मुरारी बापू ने आदि शंकराचार्य की भारत यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने का काम किया था. इसी भावना के साथ ये यात्रा भी भारत की धार्मिक परंपराओं को करीब लाने की कोशिश करेगी.

900 श्रद्धालु होंगे यात्रा में शामिल

इस यात्रा में मुरारी बापू के साथ करीब 900 श्रद्धालु शामिल होंगे. उनके सफर के लिए दो ट्रेनें रखी गई हैं. इनमें कैलाश भारत गौरव ट्रेन में 22 कोच और चित्रकूट भारत गौरव ट्रेन में 16 कोच होंगे. पूरी यात्रा के दौरान 9000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की जाएगी.

हर पड़ाव पर होगी रामकथा और भंडारे की व्यवस्था

भारत स्वास्तिक यात्रा का आयोजन मदन पालीवाल की संस्था संतकृपा सनातन संस्थान कर रही है. मदन पालीवाल मिराज ग्रुप के चेयरमैन और संतकृपा सनातन संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं. यात्रा के दौरान हर पड़ाव पर रामकथा और भंडारे का भी आयोजन होगा.

बता दें कि मुरारी बापू पिछले 65 साल से ज्यादा समय से रामकथा सुना रहे हैं. 14 साल की उम्र में उन्होंने गुजरात के एक गांव में पेड़ के नीचे बैठकर रामकथा सुनाना शुरू किया था. मुरारी बापू को रामचरितमानस की शिक्षा अपने दादा और गुरु त्रिभुवनदास जी से मिली थी. अब तक वे देश और विदेश में 950 से ज्यादा रामकथाएं कर चुके हैं. रामकथा के जरिए उन्होंने हमेशा प्रेम और समानता का संदेश दिया है. भारत स्वास्तिक यात्रा के जरिए भी उनका प्रयास सनातन धर्म की परंपराओं, सेवा और मानव कल्याण के विचारों को लोगों तक पहुंचाना है.

यह भी पढ़ें- Navratri 2026: नवरात्रि में राशि के अनुसार करें ये उपाय, एस्ट्रोलॉजर अंकित ने बताया खुल जाएंगे धनलाभ के द्वार

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Morari Bapu, Faith News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com