अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी विवाद के बीच ट्रस्ट के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक, डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से 'नैतिक' कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है. इस मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद से ही वे लगातार विपक्ष के निशाने पर थे. राम मंदिर के भव्य उद्घाटन के बाद से मंदिर प्रशासन के सामने यह अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि आखिर डॉ. अनिल मिश्रा कौन हैं और मंदिर ट्रस्ट में उनका क्या रोल था.
पेशे से डॉक्टर और RSS के सदस्य65 साल के डॉ. अनिल मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के रहने वाले हैं. वे पेशे से एक होम्योपैथी डॉक्टर हैं और पिछले 40 साल से अयोध्या में ही रहकर अपनी मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे हैं. डॉक्टरी के साथ-साथ डॉ. मिश्रा पिछले कई दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राम मंदिर आंदोलन से बेहद करीब से जुड़े रहे हैं.
प्राण-प्रतिष्ठा के 'प्रधान यजमान'जब राम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का गठन किया, तब डॉ. अनिल मिश्रा को इसके 15 शुरुआती ट्रस्टियों में शामिल किया गया था. डॉ. मिश्रा की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 22 जनवरी, 2024 को हुए ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में उन्होंने और उनकी पत्नी उषा मिश्रा ने 'प्रधान यजमान' के रूप में मुख्य भूमिका निभाई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुए सभी मुख्य धार्मिक अनुष्ठान और पूजा इन्हीं के द्वारा संपन्न कराई गई थी, जिसके बाद वे इस पूरे आंदोलन और मंदिर प्रशासन का एक बड़ा सार्वजनिक चेहरा बन गए थे.
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