Which State Leads In Education : इन दिनों देश की राजनीति का केंद्र बने केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में चुनावी तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो चुकी है. नतीजों ने जहां सियासी समीकरण बदल दिए हैं, वहीं इन राज्यों को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है. लेकिन इस राजनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा सवाल अक्सर नजरअंदाज हो जाता है कि इन राज्यों की असली ताकत सिर्फ चुनावी जीत-हार में है या एजुकेशन जैसे बुनियादी सेक्टर में भी ये उतने ही मजबूत हैं. क्या जो राज्य राजनीति में आगे दिख रहे हैं, वे पढ़ाई-लिखाई, स्कूल सिस्टम और कॉलेज तक पहुंच के मामले में भी उतनी ही बढ़त बनाए हुए हैं, या फिर यहां तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है.
केरल का दबदबा, हर पैमाने पर मजबूत पकड़
सबसे पहले केरल की बात. एजुकेशन के मामले में यह राज्य लंबे समय से देश का बेंचमार्क बना हुआ है. भारत की 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां साक्षरता दर करीब 94 प्रतिशत है, जो देश में सबसे ज्यादा मानी जाती है. इसके अलावा नीति आयोग के स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स में भी केरल लगातार टॉप परफॉर्मर रहा है. यानी यहां सिर्फ पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि क्वालिटी एजुकेशन भी मजबूत है.
तमिलनाडु, कॉलेज तक पहुंच में सबसे आगे
अगर हायर एजुकेशन की बात करें तो तमिलनाडु सबसे अलग नजर आता है. शिक्षा मंत्रालय की ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो करीब 45 से 47 प्रतिशत के आसपास है, जो राष्ट्रीय औसत लगभग 28 प्रतिशत से काफी ज्यादा है. यानी यहां बड़ी संख्या में छात्र 12वीं के बाद भी पढ़ाई जारी रखते हैं और यही इसे एजुकेशन के मामले में खास बनाता है.
पुडुचेरी, छोटा राज्य लेकिन मजबूत सिस्टम
पुडुचेरी का प्रदर्शन भी ध्यान खींचता है. यहां साक्षरता दर 85 से 88 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है. यहां के आधिकारिक सरकारी डेटाबेस UDISE+ (Unified District Information System for Education Plus) के अनुसार, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और टीचर-स्टूडेंट रेशियो देश के औसत से बेहतर है. छोटा राज्य होने के बावजूद यहां एजुकेशन सिस्टम संतुलित और असरदार नजर आता है.
असम, सुधार की अच्छी रफ्तार लेकिन अभी काफी दूर
असम में पिछले कुछ सालों में एजुकेशन सेक्टर में सुधार जरूर हुआ है. नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस के सर्वे के मुताबिक साक्षरता दर अब 75 से 78 प्रतिशत के बीच मानी जाती है. UDISE+ डेटा बताता है कि नामांकन बढ़ा है और ड्रॉपआउट घटा है. हालांकि हायर एजुकेशन और क्वालिटी के मामले में यह राज्य अभी भी टॉप राज्यों से पीछे है.
पश्चिम बंगाल, मजबूत आधार लेकिन नई चुनौती
पश्चिम बंगाल को कभी शिक्षा का गढ़ कहा जाता था. यहां साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत के आसपास है और प्राथमिक शिक्षा का ढांचा मजबूत है. लेकिन AISHE डेटा दिखाता है कि हायर एजुकेशन में राज्य तमिलनाडु जैसे राज्यों से पीछे है. यानी स्कूल तक सिस्टम ठीक है, लेकिन आगे की पढ़ाई में गैप नजर आता है.
नतीजों के बीच एजुकेशन का असली ‘स्कोरकार्ड'
अगर इन पांचों राज्यों को साथ रखें, तो तस्वीर साफ हो जाती है. केरल ओवरऑल एजुकेशन में अब भी नंबर-1 बना हुआ है. तमिलनाडु हायर एजुकेशन में सबसे आगे है. पुडुचेरी छोटा होकर भी मजबूत प्रदर्शन कर रहा है. असम तेजी से सुधार कर रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल को अपने सिस्टम को और बेहतर बनाने की जरूरत है. चुनावी नतीजों ने भले ही राजनीतिक तस्वीर बदल दी हो, लेकिन एजुकेशन के मैदान में अभी भी केरल की बादशाहत कायम है.
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