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आंध्र प्रदेश की वैज्ञानिक विमला बाथिनी का कमाल, डेनमार्क से मिली 3.6 करोड़ की फेलोशिप, इस पर करेंगी रिसर्च

बाथिनी की रिसर्च यह देखेगी कि क्या डेनमार्क फाबा बीन्स की खेती बढ़ाकर इस निर्भरता को कम कर सकता है. फाबा बीन्स प्रोटीन से भरपूर फसल है जिसे सही हालात में देश के अंदर ही उगाया जा सकता है.

आंध्र प्रदेश की वैज्ञानिक विमला बाथिनी का कमाल, डेनमार्क से मिली 3.6 करोड़ की फेलोशिप, इस पर करेंगी रिसर्च
बाथिनी की रिसर्च यह देखेगी कि क्या डेनमार्क फाबा बीन्स की खेती बढ़ाकर इस निर्भरता को कम कर सकता है.

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर की रहने वाली साइंटिस्ट विमला बाथिनी ने बड़ी एकेडेमिक अचीवमेंट मिली है. डेनमार्क सरकार ने इनको लगभग 2.5 मिलियन डेनिश क्रोनर (करीब 3.6 करोड़ रुपये) की प्रतिष्ठित पीएचडी (PhD) फेलोशिप दी है. यह फेलोशिप बाथिनी को यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न डेनमार्क (SDU) में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर में एडवांस्ड रिसर्च करने के लिए मिली है. बता दें कि यह फेलोशिप बाथिनी के तीन साल के डॉक्टरेट प्रोग्राम में मदद करेगी. यह प्रोगाम सितंबर 2026 में शुरू होगा.

फाबा बीन्स प्रोटीन पर करेंगी रिसर्च

उनके डॉक्टरेट प्रोजेक्ट का टाइटल है "FABA LOOP: Quantifying Denmark's Soy-Protein Displacement Potential with Faba Beans using Stress-Adjusted Yields and Expansion Constraints". इसका उद्देश्य यूरोप की खेती से जुड़ी एक बड़ी चुनौती इंपोर्टेड सोया प्रोटीन पर भारी निर्भरता का सॉल्युशन निकालना.

बाथिनी की रिसर्च यह देखेगी कि क्या डेनमार्क फाबा बीन्स की खेती बढ़ाकर इस निर्भरता को कम कर सकता है. फाबा बीन्स प्रोटीन से भरपूर फसल है जिसे सही हालात में देश के अंदर ही उगाया जा सकता है.

स्ट्रैटजी बनाने में मिलेगी मदद

उम्मीद है कि इस रिसर्च से ऐसे अहम सबूत मिलेंगे जो डेनमार्क को प्रोटीन के मामले में आत्मनिर्भर बनने, क्लाइमेट रेजिलिएंस (जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता) को मजबूत करने और सस्टेनेबल, प्लांट-बेस्ड फूड सिस्टम को बढ़ावा देने में मदद करेंगे. इसके नतीजों से पॉलिसी बनाने वालों को खेती में विविधता लाने और पर्यावरण के अनुकूल खेती की स्ट्रैटजी बनाने में भी मदद मिल सकती है.

इनकी देख-रेख में पूरी होगी रिसर्च

बता दें कि यह रिसर्च बाथिनी एग्रीकल्चर और लाइफ साइकिल असेसमेंट के जाने-माने एक्सपर्ट प्रोफेसर मोर्टन बिर्कवेड की देखरेख में पूरी करेंगी.

इनके को-सुपरवाइजर होंगे डॉ. श्रीनिवास राघवेन्द्र भुवन गुमिद्दी (रिमोट सेंसिंग में स्पेशलाइज्ड एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ. विनय चक्रवर्ती गोगिनेनी, (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में स्पेशलाइज्ड एसोसिएट प्रोफेसर) होंगे.

आंध्र प्रदेश में रहते हुए, बाथिनी ने 2019 से 2023 के बीच अनंतपुर जिले के रेकुलाकुंटा में हॉर्टिकल्चर रिसर्च स्टेशन में साइंटिस्ट के तौर पर काम किया. जब उनके पति को डेनमार्क में नौकरी मिली, तो वह अपनी नौकरी से लंबी छुट्टी लेकर तीन साल पहले डेनमार्क चली गईं. उनकी इस एकेडमिक अचीवमेंट को आंध्र प्रदेश के साइंटिफिक कम्युनिटी के लिए गर्व की बात माना जा रहा है.

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