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अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस: 'आईएम कलाम' से लेकर 'तारे जमीं पर'... शिक्षा का असली मतलब समझाती हैं ये फिल्में

शिक्षा समाज की मजबूत नींव है. शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जो बच्चों के भविष्य को तय करती है. शिक्षा को बढा़वा देने के लिए बॉलीवुड भी अपनी अहम भूमिका समय-समय पर निभाता आ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस: 'आईएम कलाम' से लेकर 'तारे जमीं पर'... शिक्षा का असली मतलब समझाती हैं ये फिल्में
इंटरनेशनल एजुकेशन डे

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवसः शिक्षा समाज की मजबूत नींव है. जो किसी भी राष्ट्र के विकास की दिशा  तय करती है. बच्चे देश का भविष्य होते हैं और शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है. जो उन्हें बेहतर कल की तरफ ले जाती है. शिक्षा किसी विशेष वर्ग की सुविधा  ही नहीं बल्कि सभी बच्चों का  मूल अधिकार है. शिक्षा के इस महत्व को रेखांकित करने में बॉलीवुड भी अपना अहम भूमिका  समय-समय पर  निभाता आ रहा है. अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर उन सकारात्मक सोच वाली फिल्मों की चर्चा करना प्रासंगिक हो जाता है. जो शिक्षा के क्षेत्र में उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों में आत्मविश्वास भी जगाती हैं.

‘तारे ज़मीं पर' 

हम बात करते हैं आमिर खान की फिल्म  ‘तारे ज़मीन पर'  यह फिल्म ना  केवल शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती है.बल्कि बच्चों और विद्यार्थियों को समझने और सिखाने का नया तरीका  प्रदान करती है. फिल्म में ईशान नाम के एक बच्चे की कहानी है. जिसके माता पिता उसको पढ़ाई में कमजोर समझकर  बोर्डिंग स्कूल में भेज देते हैं. जिसके बाद वहां उसकी पहचान  आमिर खान से होती है.जहां शिक्षक उसकी मानसिक स्थिति को पहचानते हैं. इतना ही नहीं यह फिल्म माता-पिता और बच्चों के रिश्ते को भी दिखाती है और उसके जीवन में  बदलाव लाती है.

‘नील बट्टे सन्नाटा'

स्वरा भास्कर की  फिल्म‘नील बट्टे सन्नाटा' यह कॉमेडी और  शिक्षा के विषय पर बनी  है.जिसे बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पांस मिला था. इस फिल्म को वैश्विक स्तर पर  'द न्यू क्लासमेट' के नाम से रिलीज किया था. यह फिल्म एक मां-बेटी की जोड़ी पर बनाई गई है. इस फिल्म में मां अपनी बेटी को पढ़ाना चाहती है, लेकिन खुद घरों में घरेलू नौकरानी का काम करती है. अपनी बेटी को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए मां बेटी की कक्षा में दाखिला ले लेती है जिसमें शर्त रखती है कि अगर वो उससे ज्यादा नंबर लेकर आएगी तो वो खुद स्कूल छोड़ देगी

'चॉक एंड डस्टर'

'चॉक एंड डस्टर' इस फिल्म में  शबाना आज़मी और जूही चावला की मुख्य भूमिका रही है. यह फिल्म टीचर और छात्रों के बीच के खास रिश्ते को दर्शाती है. फिल्म की कहानी दो शिक्षिकाओं विद्या और ज्योति के जीवन पर आधारित है.जिनके अंदर पढ़ाने का जुनून है और इसी जुनून के साथ वे स्कूली छात्रों के जीवन में आने वाली हर परेशानी का हल निकालने में उनकी मदद करती हैं.

'पाठशाला'

तो वहीं शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म 'पाठशाला' मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को उजागर कर सबके सामने रखती है. जबकि फिल्म  शिक्षा के साथ यह भी दिखाती है कि स्कूल प्रबंधन का ध्यान मुनाफा कमाने पर अधिक केंद्रित हो गया है. इस फिल्म की कहानी में शाहिद कपूर एक शिक्षक का रोल निभाते हुए  नजर आते हैं.और वह छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो जाते हैं. फिल्म में निजी स्कूलों के बढ़ते व्यवसायीकरण शिक्षा के निजीकरण और प्रबंधन की मनमानी जैसे गंभीर मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है.

'आई एम कलाम'

साल 2011 में रिलीज हुई  फिल्म 'आई एम कलाम' भी शिक्षा के क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली फिल्म रही है. इस फिल्म में किसी बड़े स्टार को कास्ट नहीं किया गया है. लेकिन फिर भी इसकी कहानी आपके दिल को छू लेगी.  यह फिल्म एक गरीब राजस्थानी बच्चे की है. जो भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रभावित  होकर शिक्षा के मार्ग पर निकल पड़ता है. इसके अलावा भी कई सारी फिल्में 'फालतू','चल चलें', 'आरक्षण', '12वीं फेल', 'कोटा फैक्ट्री', और 'थ्री इडियट्स' हैं. इन फिल्मों को भी नहीं बुलाया जा सकता है. ये फिल्में शिक्षा को महत्व को दर्शाती है और  समाज को बदलने की प्रेरणा देती  हैं.

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