विज्ञापन

‘मक्खी’ और ‘भयंकर’... बच्चों के लिए ये कैसे नाम? विवादों में घिरा राजस्थान का 'सार्थक नाम' अभियान, जानें मामला

स्कूल रजिस्टर में दर्ज बच्चों के अजीबोगरीब या अपमानजनक नाम हटाने के लिए राजस्थान सरकार ने 'सार्थक नाम' अभियान शुरू किया है. हालांकि अब ये अभियान विवादों में आ गया है. दरअसल शिक्षा विभाग ने बच्चों के नामों को लेकर जो प्रारंभिक सूची जारी की है उसपर विवाद हो रहा है.

‘मक्खी’ और ‘भयंकर’... बच्चों के लिए ये कैसे नाम? विवादों में घिरा राजस्थान का 'सार्थक नाम' अभियान, जानें मामला
शिक्षा विभाग की तैयार लगभग 3,000 नामों की सूची में 1,541 नाम लड़कियों और 1,409 नाम लड़कों के लिए सुझाए गए हैं.

राजस्थान सरकार ने हाल ही में एक पहल शुरू की है, जिसका मकसद स्कूली बच्चों के अजीबोगरीब और अपमानजनक नामों को बदलकर सार्थक नाम देना है. हालांकि राजस्थान सरकार की ये पहल - 'सार्थक नाम' अभियान अब विवादों में आ गया है. दरअसल बच्चों को नाम सुझाने वाली एक प्रारंभिक सूची विवादों में आई है. इस सूची को शिक्षा विभाग ने जारी किया है. इस सूची में ‘भिक्षा' और ‘भयंकर' जैसे नामों के सुझाव बच्चों के लिए दिए गए हैं.  न केवल अभिभावकों बल्कि टीचरों ने भी इसकी गंभीरता और मंशा पर सवाल उठाए हैं.

क्या है सार्थक नाम' अभियान

इस पहल का उद्देश्य ‘शेरू' या ‘शैतान' जैसे नामों से बच्चों को होने वाली शर्मिंदगी और आत्मसम्मान पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को दूर करना है. शिक्षा विभाग ने स्कूलों को आदेश दिए हैं कि वो अपने यहां पढ़ने वाले ऐसे बच्चों की पहचान करें, जिनका नाम अजीबोगरीब और अपमानजनक हैं. उसके बाद बच्चों के माता-पिता से मिलकर उन्हें बच्चों का नाम बदलने के लिए प्रेरित करें. हालांकि, शिक्षा विभाग की और से नामों के सुझाव की जो लिस्ट तैयार की गई है, उसमें कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिन पर सवाल उठ रहे हैं.

अधिकारियों ने पेश की सफाई

शिक्षा विभाग की तैयार लगभग 3,000 नामों की सूची में 1,541 नाम लड़कियों और 1,409 नाम लड़कों के लिए सुझाए गए हैं, जिन्हें अभिभावकों के साथ साझा किया जाना है. आलोचकों ने सूची में शामिल ‘भिक्षा', ‘भयंकर', ‘कलयुगी', ‘मक्खी', ‘उग्र' और ‘ठाना' जैसे नामों पर आपत्ति जताई है. मामला तूल पकड़ने के बाद विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक (ड्राफ्ट) सूची है. एक अधिकारी ने कहा, ‘‘यह अंतिम सूची नहीं है. इसमें कई गलतियां पाई गई हैं और शिक्षा निदेशालय जल्द ही संशोधित सूची जारी करेगा.''

अभिभावक संगठन ‘संयुक्त अभिभावक संघ' ने भी इस पहल की आलोचना करते हुए इसे बढ़ती ड्रॉपआउट दर और शिक्षकों की कमी जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कदम बताया. वहीं सरकार ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य बच्चों में आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान को मजबूत करना है.

राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और समाजशास्त्री राजीव गुप्ता ने कहा कि इनमें से कई नाम आम प्रचलन में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों के नाम रखने के पीछे आमतौर पर कोई न कोई सामाजिक या पारिवारिक संदर्भ होता है. सामाजिक कार्यकर्ता यशवर्धन सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कभी-कभी बच्चों को नकारात्मक अर्थ वाले नाम बुरी शक्तियों से बचाने के लिए दिए जाते थे, खासकर तब जब बच्चे का जन्म कई वर्षों बाद हुआ हो या पहले संतानों की मृत्यु हो चुकी हो. हालांकि, उन्होंने सूची में सुझाए गए नामों को अप्रासंगिक बताया.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Rajasthan's Sarthak Naam Abhiyan, Rajasthan Sarthak Naam Campaign Controversy, Makkhi Bhayanak Student Name, Rajasthan Sarthak Naam
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com