रविवार को फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में सामने आए हाईटेक नकल मामले के बीच बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने पहली बार आधिकारिक तौर पर अपना पक्ष रखा है. यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि अब तक की पुलिस जांच में प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. मामला परीक्षा शुरू होने के बाद ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करने की कोशिश का है, न कि पेपर लीक का. इस मामले में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद कुमार का बयान आया है.
क्या है पूरा मामला
- पुलिस को इनपुट मिला था कि कुछ उम्मीदवार इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल एग्जाम के दौरान कर रहे हैं.
- फरीदकोट, कोटकपूरा और फिरोजपुर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर इसके बाद निगरानी बढ़ाई गई थी.
- कई संदिग्ध उम्मीदवारों को हिरासत में लिया गया था.
- कुछ मौके से फरार भी हो गए थे.
- जांच एजेंसियां अब इस नकल के नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई है.
7 लोगों को किया गया गिफ्तार
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 454 से अधिक फार्मेसी अफसर पदों की भर्ती के लिए एग्जाम रखा हया था. इस एग्जाम में 6,474 उम्मीदवार शामिल हुए थे, सबसे पहले फरीदकोट के एक परीक्षा केंद्र पर यूनिवर्सिटी की टीम ने एक उम्मीदवार को ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़ा था. जिसके बाद पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया. पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर 28 संदिग्ध उम्मीदवारों को हिरासत में लिया गया. जबकि नकल रैकेट संचालित करने के आरोप में सात अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है.
यूनिवर्सिटी का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार यह संगठित नकल का प्रयास था. लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई. पूरे मामले की रिपोर्ट पंजाब सरकार को भेजी जा रही है और आगे की कार्रवाई सरकार के निर्देशों के अनुसार की जाएगी.
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