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'...तो 3 साल बाद कोर्ट रूम में बैठे होते', NEET कैंसिल करने पर NTA की सफाई; बताया- अब तक क्या एक्शन लिया?

पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद NEET-UG का एग्जाम रद्द कर दिया गया. अब NTA ने बताया है कि मामला सामने आने के बाद वही किया, जो एक एजेंसी को करना चाहिए था.

'...तो 3 साल बाद कोर्ट रूम में बैठे होते', NEET कैंसिल करने पर NTA की सफाई; बताया- अब तक क्या एक्शन लिया?
सांकेतिक तस्वीर.
IANS
  • तीन मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को पेपर लीक के कारण 12 मई को रद्द कर दिया गया
  • नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने पेपर लीक की सूचना मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई कर परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया
  • CBI ने पेपर लीक मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र से हैं
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नई दिल्ली:

तीन मई को NEET-UG का एग्जाम हुआ था लेकिन 12 मई को ही इसे रद्द कर दिया गया. इस एग्जाम में 23 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे. इस एग्जाम को कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पेपर लीक के कारण इस एग्जाम को रद्द कर दिया. इसकी जांच कर रही CBI ने अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. साथ ही देशभर में इसे लेकर छापेमारी की जा रही है.

NEET-UG की परीक्षा का पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द करने के कारण देशभर में NTA को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. NTA पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इन सबके बीच NTA ने बताया है कि पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद से NTA ने क्या-क्या किया है?

क्या-क्या एक्शन लिया गया?

  1. NTA ने बताया कि कुछ ही घंटों में एक्शन लिया गया और एग्जाम कैंसिल करने का फैसला लिया गया, ताकि असली स्टूडेंट्स को नुकसान न हो. यह ऐसा सिस्टम नहीं है जो फेल हो गया हो. यह एक ऐसा सिस्टम है जिसने ईमानदारी को चुनौती मिलने पर ठीक वैसे ही काम किया है जैसा उसे करना चाहिए था. 
  2. इनपुट 7 मई को आए थे. जैसे ही इनपुट मिला, NTA ने एक्शन लिया. अगली सुबह ही केंद्रीय एजेंसियों को भेज दिया गया. उसी दिन जांच शुरू हो गई. 4 दिन के अंदर मामले की जांच हो गई और फैसला हो गया. CBI को केस सौंप दिया गया. चार दिन सरकार की धीमी रफ्तार नहीं है. चार दिन इंस्टीट्यूशनल स्पीड है जो पहले कभी नहीं देखी गई.
  3. किसी भी एग्जाम को कैंसिल करना सबसे मुश्किल फैसला होता है. जो स्टूडेंट्स आज घर पर बैठकर दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. अगर NTA ने यह फैसला नहीं लिया होता, तो वे तीन साल बाद कोर्ट रूम में बैठे होते. दोबारा परीक्षा कराना मुश्किल होता है. सरकार ने मुश्किल लेकिन सही रास्ता चुना. NTA ने कहा कि जो स्टूडेंट्स आज घर पर बैठकर दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. अगर NTA ने यह फैसला नहीं लिया होता, तो वे तीन साल बाद कोर्ट रूम में बैठे होते.
  4. सरकार ने यह मामला सेंट्रल CBI को रेफर किया है. यह कोई इशारा नहीं है. यह एक कमिटमेंट है. CBI जांच सबूतों के आधार पर होगी, जिसमें जरूरत पड़ने पर NTA के अपने अंदरूनी प्रोसेस भी शामिल हैं. सरकार ने किसी को नहीं बचाया है. NTA ने माना है कि कॉन्फिडेंशियल प्रोसेस में कमियों को दूर किया जाएगा. कोई भी इंस्टीट्यूशन कहीं भी परफेक्ट नहीं है. टेस्ट यह है कि जब कुछ गलत होता है तो इंस्टीट्यूशन क्या करता है.
  5. NTA ने बताया कि यह एग्जामिनेशन इकोसिस्टम में हर संभावित बुरे एक्टर को बताता है कि ईमानदारी के उल्लंघन का पता लगाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी, और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे इसकी कीमत कुछ भी हो. यह हर ईमानदार स्टूडेंट को बताता है कि सरकार उनकी कोशिशों को कम नहीं होने देगी. CBI जांच से पता चलेगा कि ऐसा कैसे हुआ. 
  6. NTA ने कहा कि कैंडिडेट्स को उनकी फीस पहले ही वापस की जा रही है. दूसरी बार एग्जाम कराने का खर्च NTA खुद उठाएगा. सरकार ने यह साफ कर दिया है कि ईमानदारी की कीमत किसी भी फाइनेंशियल सोच से ज्यादा है. ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि किसी एग्जामिनेशन अथॉरिटी ने इस तरह से दोबारा कराए गए नेशनल एग्जाम का पूरा खर्च उठाया हो. CBI की जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे. लेकिन जब तक वह जांच चल रही है, छात्रों को इंतजार नहीं करवाया जा सकता और न ही उनसे दोबारा फीस ली जा सकती है.

5 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार

पेपर लीक मामले में CBI ने 12 मई को केस दर्ज किया था.  CBI ने इस मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें से तीन आरोपी राजस्थान के जयपुर से पकड़े गए हैं. एक आरोपी हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार हुआ है, जबकि एक अन्य आरोपी महाराष्ट्र के नासिक से पकड़ा गया है.

आरोपी शुभम खैरनर को नासिक से, मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल को जयपुर से और यश यादव को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया है.

जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए तकनीकी और फॉरेंसिक एनालिसिस किया जा रहा है. मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है.

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