NEET UG 2026 Paper Leak : मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) के पेपर-लीक मामले के बाद नीट यूजी की परीक्षा रद्द कर दी गई है. जिससे देश के 22 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को गहरी चिंता और अनिश्चितता में डाल दिया है. जब भी ऐसी बड़ी परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान उन मेहनती बच्चों का होता है जो दिन-रात एक कर डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस समस्या का कोई ठोस समाधान है?
इसको लेकर एजुकेशन एक्सपर्ट् देव शर्मा ने बताया कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित होने का मूल कारण इसरो के पूर्व अध्यक्ष के.राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित हाई लेवल कमेटी आफ एक्सपर्ट्स-एचएलसीई की सिफारिश का लागू नहीं किया जाना है. हाई लेवल कमेटी आफ एक्सपर्ट्स-एचएलसीई की सिफारिश में स्पष्ट किया गया था कि पेन-पेपर मोड पर आयोजित की जाने वाली इतनी बड़ी परीक्षा को एक फेज में आयोजित किया जाना तार्किक नहीं है और न्यायोचित भी नहीं है.
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देव शर्मा ने आगे बताया कि हाई लेवल कमेटी आफ एक्सपर्ट्स-एचएलसीई के 7-सदस्यों की 184-पेजों की रिपोर्ट में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी के मल्टी-स्टेज यानी एक से अधिक चरणों में आयोजन की सिफारिश की गई थी. इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (HLCE) की मानें तो, इसका एक मात्र विकल्प परीक्षा के पैटर्न में आमूल-चूल बदलाव करना है.
मल्टी-स्टेज हो नीट-यूजी परीक्षा क्यों है जरूरी?
मल्टी-स्टेज परीक्षा कराने से पेपर-लीक की संभावना अपने आप कम हो जाती है क्योंकि एक से अधिक स्तरों पर 'मैनेज' करना मुश्किल होता है. एडवांस्ड स्टेज का प्रश्नपत्र उच्च-स्तरीय होने पर समाजकंटक 'गेस-पेपर' जारी करने का हौसला नहीं जुटा पाते.
देव शर्मा ने बताया कि हाई लेवल कमेटी आफ एक्सपर्ट्स-एचएलसीई द्वारा की गई एक से अधिक चरणों की सिफारिश का सीधा मतलब था कि आयोजन जेईई-मेन/एडवांस्ड की तरह हो.
JEE-Main की तर्ज पर, 2.2 मिलियन छात्रों में से लगभग 500,000 छात्रों को 'NEET-Main' के तहत प्रारंभिक चरण में पहले योग्य घोषित किया जाना चाहिए, और उसके बाद ठीक JEE-Advanced की तरह इन 500,000 छात्रों के लिए 'NEET-Advanced' परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए. साथ ही देव शर्मा ने बताया कि नीट-एडवांस्ड के आयोजन की पात्रता-शर्तों एवं पेपर-पेटर्न पर विद्यार्थियों,अभिभावकों और शिक्षाविदों की राय है कि-
1- एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु 12वीं बोर्ड में एग्रीगेट न्यूनतम 75%-अंको (जनरल, ईडब्ल्यूएस,ओबीसी हेत) तथा एससी, एसटी कैटेगरी के लिए 65%-अंको की पात्रता शर्त लागू की जाए.
2- नीट-एडवांस्ड मे सम्मिलित होने के लिए अधिकतम प्रयासों की संख्या सीमित की जाए. 12वीं के साथ 1-अटेंप्ट तथा 12वीं के बाद 2-अटेंप्ट यानी कुल मिलाकर विद्यार्थी को अधिकतम 3-अटेम्प्ट दिए जाएं
3- नीट-एडवांस्ड के प्रश्नपत्र का पैटर्न भी जेईई-एडवांस्ड की तरह पूर्व घोषित नहीं हो, प्रश्नपत्र स्तरीय हो, प्रश्न मल्टी-कांसेप्चुअल हों, पिछले सालों में पूछे गए प्रश्नों रिपीट नहीं हो और प्रश्नों की संख्या सीमित हो.
अनियमितताएं कम होंगी और असामाजिक तत्व कमजोर पड़ेंगेएक बार जब ये सुधार लागू हो जाएंगे, तो ये उन छात्रों की संख्या पर रोक लगाएंगे जो अनावश्यक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं. वे छात्र जो परीक्षा के लिए बेहद कम तैयार होते हैं, जो बेईमान तत्वों के चंगुल में आसानी से फंस सकते हैं, और जो किसी भी कीमत पर सरकारी MBBS सीट पाने पर आमादा होते हैं-इनमें वे छात्र भी शामिल हैं जो NEET-UG परीक्षा कई बार देते हैं. इसके अलावा, परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की कुल संख्या भी सीमित कर दी जाएगी, जिससे परीक्षा का प्रबंधन और भी बेहतर हो जाएगा.
देव शर्मा ने बताया कि जब पेपर में सवालों का क्रम पहले से घोषित नहीं किया जाता या जब पेपर को किसी खास, रैंडम क्रम में तैयार किया जाता है और जब इसमें सिर्फ पिछले सालों के सवाल ही नहीं होते, तो "गेस पेपर्स" की आड़ में छात्रों का शोषण करने वाले और उनकी उम्मीदों से खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है. यहां तक कि पेपर हल करने वाले गिरोह भी हथियार डालने पर मजबूर हो जाते हैं. ठीक इसी वजह से, JEE-Advanced की परीक्षा के दौरान, पेपर लीक और पेपर हल करने वाले गिरोह आम तौर पर निष्क्रिय रहते हैं, और परीक्षा पूरी ईमानदारी के साथ संपन्न होती है.
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