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NEET UG Paper Leak Case: यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने की NTA को भंग करने की मांग की, PM को लिखा पत्र

NEET UG Paper Leak Case : बताया जा रहा है कि लातूर के एक निजी कोचिंग संस्थान ने कथित तौर पर नीट (यूजी)-2026 के आयोजन से पहले अपने छात्रों के लिए एक मॉक टेस्ट आयोजित किया था. चौंकाने वाली बात यह है कि मॉक टेस्ट के 42 प्रश्न कथित तौर पर वास्तविक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से हूबहू मेल खाते थे.

NEET UG Paper Leak Case: यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने की NTA को भंग करने की मांग की, PM को लिखा पत्र
NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी है.

NEET UG Paper Leak Case: NEET-UG 2024 और 2026 के पेपर लीक मामले को लेकर नीति आयोग में रजिस्टर्ड एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है. पत्र लिखते हुए पीएम से अपील की गई है कि इस मामले की संयुक्त जांच का आदेश दिया जाए. साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तुरंत भंग किया जाए और मेडिकल शिक्षा में बड़े सुधार किए जाएं. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में, UDF के चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने बार-बार सामने आ रहे लीक विवादों का जिक्र करते हुए कहा है  मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा कम हुआ है. 

छात्रों का भविष्य दांव पर

पत्र में लिखा गया है, देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था आज एक गंभीर संकट से गुज़र रही है. NTA और NMC के भ्रष्ट तरीकों और अयोग्यता के कारण, लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है. बता दें कि अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए NTA हर साल NEET-UG परीक्षा आयोजित करवाती है. ये परीक्षा लगातार सवालों के घेरे में रही है. साल 2024 की परीक्षा में कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं और इसका भी पेपर लीक हुआ था. वहीं अब NEET-UG 2026 की परीक्षा को पेपर लीक के चलते रद्द कर दिया गया है. ये परीक्षा हाल ही में 3 मई को हुई थी.

NTA ने 12 मई को इस परीक्षा को रद्द कर दिया है. इस परीक्षा में भी पेपर लीक होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं, खास तौर पर राजस्थान से, जहां एक "गेस पेपर" सर्कुलेट हुआ था, जिसमें कई ऐसे सवाल थे जो कि असल परीक्षा परीक्षा के सवालों से हूबहू मेल खाते थे.

UDF ने कहा है कि 2026 की घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है, बल्कि यह 2024 के उन अनसुलझे मुद्दों से जुड़ा है जिनका समाधान अभी तक नहीं हुआ है. पत्र में ज़ोर देकर कहा गया, "अगर 2024 के मामले में निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच हुई होती, तो शायद 2026 में यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति दोबारा पैदा न होती. इसलिए, 2026 के मामले की जांच 2024 के मामले के साथ मिलकर की जानी चाहिए."

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