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NEET पेपर 10-30 लाख में बिका, 800 छात्रों तक पहुंचा... 23 लाख स्टूडेंट्स के सपनों से खिलवाड़ करने वाला महाघोटाला उजागर

NEET पेपर लीक मामले में 10 से 30 लाख रुपये में पेपर बेचकर करोड़ों का खेल किया गया और यह 800 छात्रों तक पहुंचा. जांच में 150 संदिग्ध सामने आए हैं. महाराष्ट्र में भी गिरफ्तारी हुई है और देशभर में फैले नेटवर्क का खुलासा हो रहा है.

NEET पेपर 10-30 लाख में बिका, 800 छात्रों तक पहुंचा... 23 लाख स्टूडेंट्स के सपनों से खिलवाड़ करने वाला महाघोटाला उजागर
NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करते NSUI कार्यकर्ता.
  • NEET 2026 पेपर लीक मामले में जयपुर और हरियाणा से जुड़े सिंडिकेट ने पेपर 10-15 लाख रुपये में बेचा.
  • पेपर परीक्षा से घंटों पहले PDF के रूप में लीक हुआ, जिसमें असली पेपर के बायोलॉजी और केमिस्ट्री सवाल शामिल थे.
  • जांच में करीब 150 संदिग्धों की पहचान हुई है, जिनमें से लगभग 20 मुख्य आरोपियों पर फोकस किया जा रहा है.
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नई दिल्ली:

NEET 2026 पेपर लीक मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. जांच में सामने आया है कि पेपर लाखों में बेचा गया और सैकड़ों छात्रों तक पहुंचाया गया, जबकि अब महाराष्ट्र कनेक्शन भी और गहरा होता दिख रहा है.

कितने में बेचा गया NEET का लीक पेपर?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, जयपुर और हरियाणा से जुड़े सिंडिकेट ने NEET का पेपर 10 से 15 लाख रुपये में बेचा. वहीं कुछ मामलों में इसे 25 से 30 लाख रुपये तक में खरीदा गया. एक ही पेपर को कई छात्रों तक बेचकर गिरोह ने करोड़ों रुपये का नेटवर्क खड़ा कर लिया, जिसके ठोस सबूत एजेंसियों के पास मौजूद हैं.

कैसे चला पूरा रैकेट

पूरे मामले में एक संगठित नेटवर्क के काम करने के संकेत मिले हैं. हरियाणा से पेपर लीक होने के बाद यह जयपुर और सीकर जैसे कोचिंग हब में ‘गेस पेपर' के नाम पर फैलाया गया. इस गेस पेपर में 400 से ज्यादा सवाल शामिल किए गए थे, जिनके भीतर असली पेपर के बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 45 सवाल छिपाकर छात्रों को दिया गया.

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कई घंटों पहले ही घूम रहा था पेपर

जांच में सामने आया है कि पेपर परीक्षा से कई घंटे पहले ही सर्कुलेशन में आ गया था. 2 मई की रात इसे PDF के रूप में शेयर किया गया और 3 मई की परीक्षा के बाद जब सवालों का मिलान हुआ, तो बड़ी संख्या में प्रश्न मैच होने से पूरे मामले का खुलासा हो गया.

ऐसे फूटा पेपर लीक का भांडा

सीकर के एक पीजी संचालक को ‘गेस पेपर' संदिग्ध लगा. उन्होंने शिक्षकों से सवाल मिलवाए, जहां बड़ी संख्या में प्रश्न असली पेपर से मेल खाते पाए गए. इसके बाद NTA और एजेंसियों को सूचना दी गई, जिससे जांच शुरू हुई और मामला धीरे-धीरे बड़े नेटवर्क तक पहुंचा.

कई राज्यों तक फैला जांच का दायरा

इस मामले में अब जांच एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है. करीब 150 लोगों को संदिग्ध माना गया है, जबकि करीब 20 मुख्य संदिग्धों पर फोकस किया गया है. CBI ने जांच अपने हाथ में लेकर कई राज्यों में पूछताछ तेज कर दी है और आरोपियों की भूमिका तय की जा रही है.

कहां से जुड़ा कनेक्शन

जांच में पेपर लीक का नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान से होते हुए महाराष्ट्र तक पहुंचा है. नासिक में सोर्स मिलने के संकेत मिल चुके हैं, जबकि पुणे और लातूर कनेक्शन की भी जांच चल रही है. इसी कड़ी में एक और आरोपी धनंजय लोखंडे को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से गिरफ्तार किया गया है. जांच में सामने आया कि उसका आखिरी लोकेशन पुणे में था, जहां से वह पुलिस रेड से बचने के लिए भागकर अहिल्यानगर पहुंच गया था. पुलिस और विशेष जांच टीम ने जाल बिछाकर उसे हिरासत में लिया. फिलहाल उससे गहन पूछताछ जारी है और संभावना है कि उससे पूरे नेटवर्क के बारे में बड़े खुलासे हो सकते हैं. महाराष्ट्र में इस मामले में अब तक दो गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

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करीब 23 लाख छात्रों पर असर

इस पेपर लीक का असर करीब 23 लाख छात्रों पर पड़ा है. परीक्षा रद्द होने के बाद अब उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी, जिससे उनमें निराशा और तनाव बढ़ गया है. NEET पेपर लीक मामला अब राष्ट्रीय स्तर के संगठित घोटाले के रूप में सामने आ रहा है. करोड़ों रुपये के इस नेटवर्क में कई राज्यों के तार जुड़े हैं और लगातार हो रही गिरफ्तारियां इशारा कर रही हैं कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

SC पहुंचा मामला

NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने याचिका दाखिल कर परीक्षा दोबारा कराने की मांग की है. साथ ही पूरी प्रक्रिया को कोर्ट की निगरानी में कराने की अपील की गई है.

याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक और गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और वर्तमान परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है. इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं और उसे हटाकर या पुनर्गठित कर अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत संस्था बनाने की मांग की गई है.

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