हाल ही के समय में स्कूली और उच्च शिक्षा सिलेबस में कई बदलाव किए गए. इन बदलावों को लेकर काफी विवाद भी हुए. ताजा विवाद जम्मू यूनिवर्सिटी से जुड़ा है. जम्मू यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस विभाग ने जो नया सिलेबस जारी किया है, उसमें मोहम्मद अली जिन्ना से जुड़ा एक अध्याय भी शामिल है. इस अध्याय के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने यूनिवर्सिटी परिसर में जोरदार प्रदर्शन कर रही है. एबीवीपी का तर्क है कि जम्मू विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग ने 2026–2028 का जो पाठ्यक्रम जारी किया है, उसमें 'मॉर्डन इंडियन पॉलिटिकल थॉट' के अंतर्गत कुछ व्यक्तियों को अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधि बताया गया है, जिनमें सर सैयद अहमद खान और मुहम्मद अली जिन्ना शामिल हैं. ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने देश के विभाजन में भूमिका निभाई और द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का प्रचार किया. इनके बारे में पढ़ाना चिंता का विषय है.
जम्मू यूनिवर्सिटी से पहले NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों के सिलेबस को लेकर भी काफी विवाद हुआ है. हालिया हुए प्रमुख विवाद कुछ इस तरह हैं-
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न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का अध्याय - कक्षा 8
NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' और लंबित मुकदमों के बोझ से संबंधित एक अध्याय हाल ही में शामिल किया गया था. जिसको लेकर काफी विवाद हुआ और ये मामला कोर्ट तक जा पहुंचा. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने इस पर कड़ी नाराजगी भी जताई और इसे न्यायपालिका को बदनाम करने वाली 'सोची-समझी कार्रवाई' तक करार दिया. विवाद के बाद NCERT ने इस 'विवादास्पद' अध्याय को हटा दिया. साथ ही माफी मांगी थी.
टीपू सुल्तान का अध्याय
साल 2025 में NCERT ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक (Social Science: Part I) से टीपू सुल्तान, उनके पिता हैदर अली और 18वीं शताब्दी के एंग्लो-मैसूर युद्धों से जुड़ी सारी चीजे हटा दी थी. नई किताब में उनकी जगह रानी दुर्गावती और अहिल्याबाई होलकर जैसे भारतीय शासकों का जिक्र किया गया है. टीपू सुल्तान के अध्याय को हटाए जाने पर शिक्षा मंत्रालय के तर्क किया था कि ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत पाठ्यक्रम का बोझ कम करने के लिए किया गया है.
'महान' शब्द हटाने पर विवाद
नवंबर 2025 में NCERT ने मुगल शासक अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम के आगे से 'महान' (The Great) शब्द हटा दिया था. इसको लेकर भी काफी विवाद हुआ था. जहां RSS और BJP नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया था. वहीं विपक्षी दलों ने इस कदम पर आपत्ति जताई थी.
इसके अलावा साल 2024 में NCERT की 12वीं की पॉलिटिकल साइंस किताब में अयोध्या विवाद से लेकर बाबरी मस्जिद से जुड़े कुछ बदलाव किए गए थे. संशोधित टेक्स्ट बुक में बाबरी मस्जिद का नाम नहीं लिखा गया है. इसे 'तीन गुंबद वाली संरचना' कहा गया था. साथ ही अयोध्या सेक्शन को चार से दो पेज का कर दिया गया था. इसके अलावा अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र भी किताब में किया था. इसके लेकर भी विवाद हुआ था और कुछ लोगों ने इसे इतिहास को मिटाने की कोशिश करार दिया था.
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