खान सर देश के सबसे चर्चित शिक्षकों में शामिल हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच वे एक बड़ा नाम हैं. अपनी आसान भाषा, अनोखे पढ़ाने के अंदाज और कम फीस में शिक्षा उपलब्ध कराने की वजह से उन्होंने लाखों छात्रों के बीच खास पहचान बना ली है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में हुआ था. शुरू से ही उनका सपना सेना में जाने का था. उन्होंने NDA का टेस्ट भी पास किया था, लेकिन मेडिकल कारणों से वे बाहर हो गए थे.
खान सर चर्चाओं में क्यों रहते हैं?
खान सर चर्चाओं में रहने की असली वजह यह है कि वे देश-दुनिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय लोकल भाषा और उदाहरणों के द्वारा रखते हैं. खान सर राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं. वे बच्चों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाते हैं. जैसे- नीट पेपर लीक पर उन्होंने कहा कि “पेपर को अब एयर फोर्स की टीम पहुंचाएगी, अच्छी बात है, लेकिन मलेरिया की बीमारी में टाइफाइड का इंजेक्शन नहीं लगाया जाता.” पेपर लीक के दोषियों की सजा पर खान सर ने कहा, “आप लोगों से एक विनती है कि जो पेपर लीक कर रहा है, उन्हें फांसी तक पहुंचाइए, उसके नीचे कोई सजा नहीं होनी चाहिए.
खान सर की पढ़ाई कहां से हुई?
खान सर एक मिडिल क्लास फैमिली से आते हैं. उनकी सफलता में उनके माता-पिता का बहुत बड़ा रोल है. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देवरिया के स्कूल से हुई. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और वहां से B.Sc. तथा M.Sc. की डिग्री प्राप्त की. इसके अलावा उनके पास भूगोल में M.A. की डिग्री भी है.
सफलता में किसका साथ मिला?
हर बच्चे की सफलता में बच्चे की खुद की मेहनत और परिवार के सपोर्ट से ही सफलता मिलती है, लेकिन खान सर की सफलता में परिवार के अलावा उनके छात्रों ने भी बहुत साथ दिया. कोचिंग की शुरुआत से ही बच्चों ने बहुत सहायता की. कह सकते हैं कि गुरु को बड़ा उसका शिष्य ही बनाता है.
खान सर की 40 रुपये की कहानी, उसके बाद बने मशहूर टीचर
खान सर बताते हैं कि जब वे अपनी जिंदगी से हार मान चुके थे, तब वे घर वापस लौटना चाहते थे, लेकिन घर जाने के लिए 90 रुपये किराया नहीं था. उनके पास सिर्फ 40 रुपये थे. अगर खान सर उस समय घर वापस लौट जाते तो शायद इतने बड़े टीचर नहीं बन पाते. खुद की कोचिंग खोलने से पहले उनके पास सिर्फ 40 रुपये थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने कोचिंग खोली और अपने सपने को पूरा किया. शुरुआत से ही उन्होंने विकलांग और गरीब बच्चों से कभी फीस नहीं ली. आज भी खान सर बहुत से बच्चों को फ्री शिक्षा देते हैं.
खान सर की कोचिंग में कितने बच्चे पढ़ते थे?
जब खान सर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, तो अपना खर्च चलाने के लिए उन्होंने दूसरी कोचिंग में पढ़ाना शुरू किया. शुरुआत में वहां सिर्फ 6 बच्चे थे. उसके बाद हर दिन बच्चों की संख्या बढ़ती गई. लेकिन एक दिन उस संस्थान ने बच्चों से ज्यादा फीस मांगनी शुरू कर दी, जिसके बाद खान सर ने वह कोचिंग छोड़ दी और अपनी कोचिंग की शुरुआत की, जिसका नाम खान ग्लोबल स्टडीज रखा गया. शुरुआत से ही खान सर की फीस सबसे कम थी.
खान सर के कोर्सों की फीस क्या है?
खान सर पहले सिर्फ ऑफलाइन पढ़ाते थे, लेकिन कोरोना आने के बाद कोचिंग सेंटर बंद हो गए. उसके बाद उन्होंने ऑनलाइन क्लासेस शुरू कीं. आज उनके यूट्यूब चैनल पर 25 मिलियन से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं. उनके कोर्सों की फीस अलग-अलग है,150 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक. वे सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते हैं. एक समय था जब UPSC की तैयारी के लिए बच्चों को लाखों रुपये फीस देनी पड़ती थी, वहीं खान सर सिर्फ 8 से 10 हजार रुपये में UPSC की तैयारी करवाते हैं.
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