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क्या है APAAR आईडी, जिसमें रजिस्ट्रेशन के बिना बोर्ड परीक्षा नहीं दे सकते हैं छात्र

APAAR ID हर छात्र के लिए एक यूनिक डिजिटल अकादमिक पहचान है. इसका मकसद छात्रों के पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड को एक जगह सुरक्षित रखना और ट्रैक करना है.

क्या है APAAR आईडी, जिसमें रजिस्ट्रेशन के बिना बोर्ड परीक्षा नहीं दे सकते हैं छात्र
APAAR ID क्यों है जरूरी

CBSE ने बोर्ड परीक्षाओं से जुड़ा एक अहम बदलाव लागू करने की तैयारी कर ली है. 2026–27 सत्र से छात्रों को बोर्ड एग्जाम रजिस्ट्रेशन भरते समय APAAR ID देना जरूरी होगा. यानी जिन छात्रों के पास यह आईडी नहीं होगी, उनका रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं माना जाएगा. बोर्ड का कहना है कि इस कदम से छात्रों का अकादमिक रिकॉर्ड ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर APAAR ID है क्या, इसे इतना जरूरी क्यों बनाया जा रहा है और इससे छात्रों को क्या फायदा होगा. CBSE के फैसले के बाद ये चर्चा तेज हो गई है.

क्या है APAAR ID और क्यों है जरूरी

APAAR ID हर छात्र के लिए एक यूनिक डिजिटल अकादमिक पहचान है. इसका मकसद छात्रों के पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड को एक जगह सुरक्षित रखना और ट्रैक करना है. CBSE ने APAAR ID को क्लास 9 से 12 के रजिस्ट्रेशन और लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स मॉड्यूल से जोड़ दिया है. इस व्यवस्था से हर छात्र का वेरिफाइड और यूनिक अकादमिक रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे डेटा में एकरूपता रहेगी और लाइफटाइम रिकॉर्ड मैनेज करना आसान होगा.

बोर्ड ने अगस्त में स्कूलों को निर्देश दिया था कि रजिस्ट्रेशन और LOC भरने से पहले छात्रों की APAAR ID तैयार कर ली जाए. उस समय हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों ने ID बनाने में दिक्कत की बात कही थी और 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए राहत मांगी थी.


कई राज्य नहीं बना सके थे स्टूडेंट्स की APAAR ID

बोर्ड के आंकड़ों में राज्यों के बीच बड़ा अंतर दिखा. पश्चिम बंगाल में क्लास 9 के सिर्फ 9.01 प्रतिशत और क्लास 11 के 17.83 प्रतिशत छात्रों के पास APAAR ID थी. हरियाणा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही. यहां क्लास 9 में 54.42 प्रतिशत और क्लास 11 में 54.80 प्रतिशत छात्रों की ID बन चुकी थी. दूसरे राज्यों में भी स्थिति कमजोर रही.

गुजरात में क्लास 9 के 27.59 प्रतिशत और क्लास 11 के 19.94 प्रतिशत छात्रों के पास APAAR ID थी. बिहार में यह आंकड़ा क्लास 9 के लिए 23.59 प्रतिशत और क्लास 11 के लिए 26.01 प्रतिशत रहा. लेकिन अब 2026–27 के लिए रजिस्ट्रेशन और LOC डेटा भरते समय APAAR ID अनिवार्य फील्ड होगी. साथ ही CBSE उन राज्यों के स्कूलों की मदद करेगा जहां ID बनाने में परेशानी आई थी. बोर्ड को उम्मीद है कि अगले साल तक स्थिति बेहतर होगी.

2028 से क्लास 10 में दो स्तर की बोर्ड परीक्षा

CBSE ने यह भी पुष्टि की है कि 2028 से क्लास 10 में मैथ्स, साइंस और सोशल साइंस की बोर्ड परीक्षाएं दो स्तर पर होंगी. दो स्तर वाले करिकुलम का प्रस्ताव 2024 में ही मंजूर हो चुका है. 2026–27 से क्लास 9 में पढ़ाई दो लेवल स्टैंडर्ड और एडवांस्ड में होगी. अभी CBSE में यह व्यवस्था सिर्फ मैथ्स में है, जहां छात्रों के लिए बेसिक और स्टैंडर्ड दो तरह के पेपर होते हैं.

स्कूलों को तैयारी का पर्याप्त समय देने के बाद 2028 में इन विषयों की दो लेवल की बोर्ड परीक्षा कराई जाएगी. इस दौरान NCERT को नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के मुताबिक नई किताबें तैयार करनी हैं. क्योंकि क्लास 9 से 12 की अपडेटेड NCERT किताबें अभी आनी बाकी हैं, इसलिए 2026–27 सत्र में मौजूदा सिलेबस और करिकुलम ही जारी रहेगा.

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