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फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले छात्रों का क्या होता है? जानें कहां नहीं मिलती है नौकरी

फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेना छात्रों के करियर के लिए बड़ा खतरा बन सकता. है। ऐसी डिग्री सरकारी और निजी नौकरियों में अमान्य होती है. प्रवेश से पहले यूजीसी से मान्यता जांचना बेहद जरूरी है. वरना समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं.

फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले छात्रों का क्या होता है? जानें कहां नहीं मिलती है नौकरी
फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने का नुकसान

फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेना आज के समय में एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. कई छात्र जल्दी डिग्री पाने या कम खर्च में पढ़ाई पूरी करने के लालच में ऐसे संस्थानों का रुख कर लेते हैं, जो मान्यता प्राप्त नहीं होते. बाद में जब नौकरी की बारी आती है तो उन्हें कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ता है. न सिर्फ उनकी डिग्री अमान्य घोषित हो सकती है. बल्कि करियर भी दांव पर लग जाता है. हाल ही में यूजीसी ने भी करीब 32 यूनिवर्सिटी की लिस्ट जारी की है. जिन्हें फर्जी बताया गया है. ऐसी यूनिवर्सिटी से पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का भविष्य भी अक्सर खतरे में पड़ जाता है. आइए समझते हैं कि फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले छात्रों के साथ आगे क्या होता है और उन्हें किन जगहों पर नौकरी नहीं मिलती.

क्या होती हैं फर्जी यूनिवर्सिटी?

भारत में हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को मान्यता देने का काम University Grants Commission (यूजीसी) करती है. समय समय पर यूजीसी ऐसी संस्थाओं की सूची जारी करती है जो बिना मान्यता के डिग्री दे रही होती हैं. ये संस्थान खुद को लीगल यूनिवर्सिटी बताकर छात्रों को गुमराह करते हैं. कई बार इनके नाम असली विश्वविद्यालयों से मिलते जुलते होते हैं. जिससे भ्रम और बढ़ जाता है.

सरकारी नौकरी में नहीं होती मान्यता

फर्जी यूनिवर्सिटी की डिग्री रखने वाले छात्रों को केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों में आवेदन करने का अधिकार नहीं मिलता. चाहे भर्ती यूपीएससी के जरिए हो या राज्य लोक सेवा आयोग से, दस्तावेज सत्यापन के दौरान डिग्री अमान्य पाई जाती है. तब ऐसे में उम्मीदवारी रद्द कर दी जाती है और कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

निजी कंपनियां भी करती हैं जांच

आजकल बड़ी निजी कंपनियां भी बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कराती हैं. यदि डिग्री किसी फर्जी संस्थान की पाई जाती है. तो नौकरी का ऑफर तुरंत रद्द हो सकता है. कई मल्टीनेशनल कंपनियां तो सिर्फ मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी की डिग्री ही स्वीकार करती हैं. एक बार रिकॉर्ड खराब होने पर भविष्य में दूसरी कंपनियों में अवसर मिलना भी मुश्किल हो जाता है.

विदेश में भी नहीं मिलती मान्यता

विदेश में पढ़ाई या नौकरी के लिए आवेदन करते समय भी डिग्री की वैधता जांची जाती है. फर्जी यूनिवर्सिटी की डिग्री होने पर वीजा तक खारिज हो सकता है. इससे छात्र का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो जाते हैं.

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