ICSSR: आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का है, और भारत इसमें पीछे नहीं रहना चाहता. इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ICSSR (इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च) ने शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर एक नया नेशनल कैंपेन "युवा शोध प्रतिभा" लॉन्च करने का फैसला किया है. इस बारे में एनडीटीवी से बात करते हुए ICCSR के मेंबर सेक्रेटरी धनंजय सिंह ने बताया कि इस राष्ट्रीय अभियान के तहत युवाओं को AI स्किल्ड बनाने और शिक्षा और शोध में AI के बेहतर इस्तेमाल की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी
"विकसित भारत" के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में युवाओं को AI के बारे में स्किल्ड बनाना बेहद जरूरी है.
युवाओं के लिए क्यों जरूरी है AI?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मानना है कि "AI for All" (सबके लिए AI) हो. यानी सरकार चाहती है कि AI का इस्तेमाल केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर 'लोकतांत्रिक' बने, यानी हर छात्र और युवा को इसकी ताकत का पता हो.

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सोशल साइंटिस्ट (Social Scientists), विशेषकर युवा सोशल साइंटिस्ट्स की बेहद अहम भूमिका है. क्योंकि समाज शास्त्री (Social Scientists) सरकार को समाज के साथ कनेक्ट करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
रिसर्च का बदलेगा तरीका
अब ICSSR के प्रोजेक्ट्स में AI से जुड़े विषयों को खास अहमियत दी जा रही है. पिछले साल ही काउंसिल ने बीमारियों के पहले से अनुमान (predictive diagnosis) और शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के बीच के अंतर को समझने के लिए AI मैपिंग जैसी पहल शुरू की है.
गलत इस्तेमाल पर लगेगी लगाम
इस कैंपेन में AI के एथिकल (नैतिक) इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा. युवाओं को सिखाया जाएगा कि कैसे बिना किसी गलत काम के रिसर्च टूल्स का सही उपयोग करना है. इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को AI की ताकत से वाकिफ कराना और नए रिसर्च टूल्स विकसित करने के लिए प्रेरित करना है.अब कोशिश यह है कि इसे बड़े स्तर पर स्कूलों और कॉलेजों के सिस्टम में भी AI को शामिल किया जाए.
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