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Vibe Coding vs Traditional Coding : AI ने बदली कोडिंग की दुनिया, Vibe Coding से मिनटों में बनाएं ऐप और Website

आजकल Vibe Coding नाम का एक नया ट्रेंड चर्चा में है, जो Traditional Coding से बिल्कुल अलग है. हालांकि, इनका मकसद तो एक ही है, लेकिन उस काम को करने का तरीका अलग है. एक में हर चीज मैन्युअली की जाती है, तो दूसरे में AI की मदद से काम तेजी से होता है.

Vibe Coding vs Traditional Coding : AI ने बदली कोडिंग की दुनिया, Vibe Coding से मिनटों में बनाएं ऐप और Website
Traditional Coding के लिए डेवलपर्स को कोड एडिटर और लोकल सर्वर जैसे टूल्स की जरूरत होती है.

What is Vibe Coding : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ कोडिंग की दुनिया में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. आजकल Vibe Coding नाम का एक नया ट्रेंड चर्चा में है, जो Traditional Coding से बिल्कुल अलग है. हालांकि, इन दोनों तरीकों का मकसद सॉफ्टवेयर बनाना ही है. 

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Vibe Coding क्या है?

Vibe Coding एक ऐसा तरीका है, जिसमें यूजर सीधे कोड लिखने की बजाय AI टूल्स जैसे ChatGPT या Claude की मदद से सॉफ्टवेयर बनाता है. इसमें यूजर अपनी जरूरत या आइडिया को आसान भाषा में AI को बताता है और AI उसके अनुसार कोड तैयार कर देता है. इसमें प्रोग्रामिंग की कठिन भाषाएं और नियम याद करने की जरूरत नहीं होती. इसमें कोड की बारीकियों के बजाय पूरा फोकस आइडिया और फाइनल रिजल्ट पर होता है.

Traditional Coding क्या है?

Traditional Coding में डेवलपर खुद ही प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे Python, Java या C++ में लाइन-बाय-लाइन कोड लिखता है. यह एक क्लासिक तरीका है, जिसमें कंप्यूटर को निर्देश दिए जाते हैं ताकि वह सही तरीके से काम कर सके. इसमें टेक्निकल नॉलेज, लॉजिक और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स की जरूरत होती है. इसके साथ ही छोटी-छोटी गलतियों को भी खुद ही ठीक करना पड़ता है.

दोनों में क्या अंतर है

Vibe Coding और Traditional Coding का मकसद तो एक ही है, लेकिन उस काम को करने का तरीका अलग है. Traditional Coding में हर चीज मैन्युअली की जाती है, जबकि Vibe Coding में AI की मदद से काम तेजी से होता है. अगर आउटपुट सही नहीं आता, तो Vibe Coding में यूजर बस AI को दोबारा निर्देश देता है, जबकि Traditional Coding में खुद कोड को डिबग करना पड़ता है.

Traditional Coding के लिए डेवलपर्स को कोड एडिटर और लोकल सर्वर जैसे टूल्स की जरूरत होती है. वहीं, Vibe Coding में यूजर सीधे AI चैट इंटरफेस का इस्तेमाल करता है और वहीं से पूरा काम हो जाता है. इसे एक उदहारण से समझते हैं - 

मान लेते हैं कि आपको अपने जूतों के बिजनेस के लिए वेबसाइट बनानी है. इसके लिए एक ट्रेडिशनल प्रोग्रामर कोड एडिटर खोलता है और घंटों तक HTML फॉर्मेटिंग, CSS स्टाइलिंग और JavaScript लॉजिक टाइप करने में बिताता है. वहीं, एक 'वाइब कोडर' एक AI चैटबॉट खोलता है और एक प्रॉम्प्ट टाइप करता है, जैसे- "जूतों के बिजनेस के लिए एक वेबपेज बनाओ." AI कुछ ही सेकंड में जरूरी फाइलें तैयार कर देता है. इसके बाद वाइब कोडर बस उस आउटपुट को कॉपी करके अपनी साइट पब्लिश कर देता है.

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