विज्ञापन

ऑन स्क्रीन मार्किंग और थ्री लैंग्वेज सिस्टम... इन दो बड़े विवादों में फंसा CBSE, आखिर क्यूं उठ रहे गंभीर सवाल?

CBSE Controversies : हाल ही में जारी हुए 12वीं बोर्ड रिजल्ट के बाद हजारों छात्रों और पैरेंट्स ने कॉपी चेकिंग प्रोसेस पर सवाल उठाए हैं. वहीं दूसरी ओर लागू किए गए थ्री लैंग्वेज सिस्टम को लेकर राजनीतिक और शैक्षिक बहस तेज हो गई है.

ऑन स्क्रीन मार्किंग और थ्री लैंग्वेज सिस्टम... इन दो बड़े विवादों में फंसा CBSE, आखिर क्यूं उठ रहे गंभीर सवाल?
CBSE के दो बड़े विवाद

CBSE Controversies: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) इन दिनों दो बड़े विवादों को लेकर लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहा है. हाल ही में जारी हुए 12वीं बोर्ड रिजल्ट के बाद हजारों छात्रों और पैरेंट्स ने कॉपी चेकिंग प्रोसेस पर सवाल उठाए हैं. वहीं दूसरी ओर कक्षा 9वीं और 10वीं में लागू किए गए थ्री लैंग्वेज सिस्टम को लेकर राजनीतिक और शैक्षिक बहस तेज हो गई है. एक तरफ छात्र कम मार्क्स और टेक्निकल खामियों की शिकायत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर नई लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर कई राज्यों में विरोध बढ़ता दिखाई दे रहा है. इन दोनों मुद्दों ने न केवल CBSE बल्कि शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर विवाद

इस साल CBSE ने 12वीं क्लास की कॉपीज को ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के जरिए चेक किया है. इस प्रोसेस में छात्रों की कॉपीज को स्कैन करके उनकी डिजिटल कॉपी बनाई गई, जिसे टीचर्स ने कंप्यूटर स्क्रीन पर देखकर चेक किया. बोर्ड का दावा था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मार्क्स को जोड़ने में होने वाली गलतियों को रोका जा सकेगा.

हालांकि, रिजल्ट आने के बाद छात्रों और टीचर्स ने इस नए सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कई छात्रों का कहना है कि स्टेप मार्किंग के सख्त जांच नियमों की वजह से उन्हें उम्मीद से कम मार्क्स मिले हैं. उधर, टीचर्स का भी आरोप है कि सॉफ्टवेयर की टेक्निकल खामियों के कारण कुछ उत्तर चेक होने से छूट गए हैं, जिससे छात्रों का नुकसान हुआ है.

इस दौरान कुछ पेरेंट्स का कहना है कि कंप्यूटर से चेक करने में जवाबों को सही तरीके से समझा नहीं गया, इसलिए छात्रों को उनके उत्तरों के हिसाब से पूरे मार्क्स नहीं मिले हैं. हालांकि,विरोध बढ़ने के बाद CBSE ने कॉपियों को दोबारा चेक कराने की फीस भी कम कर दी है.

थ्री लैंग्वेज सिस्टम 

CBSE की तरफ से 9वीं और 10वीं क्लास के लिए लागू किया गया थ्री लैंग्वेज सिस्टम भी विवादों में घिर गया है. नए नियमों के अनुसार छात्रों को अंग्रेजी के अलावा दो दूसरी भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी. इस नीति का कई राज्यों, खासकर गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में विरोध हो रहा है. तमिलनाडु समेत कई राज्यों के राजनीतिक दल इसे “हिंदी थोपने” की कोशिश बता रहे हैं. शिक्षाविदों (Academicians) का कहना है कि एजुकेशनल सेशन के बीच में इस तरह के बदलाव से छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा.

इसके अलावा कई स्कूलों में लैंग्वेज टीचर्स और टेक्स्टबुक्स की कमी भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है. पैरेंट्स का मानना है कि बिना पर्याप्त तैयारी के इस नीति को लागू करना छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है.

CBSE और शिक्षा मंत्रालय पर बढ़ा दबाव

इन दोनों विवादों के कारण CBSE और शिक्षा मंत्रालय पर लगातार दबाव बढ़ रहा है. छात्र, पैरेंट्स और टीचर्स पारदर्शी इवैल्यूएशन सिस्टम और प्रैक्टिकल शिक्षा नीतियों की मांग कर रहे हैं. आने वाले समय में बोर्ड इन मुद्दों पर क्या कदम उठाता है, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है.

कॉपी कैसे चेक हुई, कैसे मिले नंबर? CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर छात्रों के 10 सवाल और उनके जवाब

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com