US Space Science Workshop: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली पांच लड़कियों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. इन छात्राओं का सिलेक्शन अमेरिका के मशहूर 'यूएस स्पेस एंड रॉकेट सेंटर' (US Space and Rocket Center) में होने वाले 'स्पेस साइंस वर्कशॉप' के लिए हुआ है. एक कड़े मुकाबले और सेलेक्शन प्रोसेस से गुजरने के बाद इन स्टूडेंट्स ने यह मुकाम हासिल किया है. दिल्ली के अलग-अलग सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों से 400 से ज्यादा छात्राओं ने इसके लिए आवेदन किया था, जिनमें से इन पांच होनहारों को चुना गया.
हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन चुनी गई छात्राओं से मुलाकात की और उन्हें बधाई देते हुए उनके हवाई टिकट (ट्रेवल टिकट्स) सौंपे. यह स्पेशल वर्कशॉप इसी साल अक्टूबर-नवंबर 2026 में आयोजित होने वाली है, जहां इन बच्चियों को अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) और STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) को करीब से समझने और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग लेने का मौका मिलेगा.
क्या है यह यूएस स्पेस साइंस वर्कशॉप ?
इस खास कार्यक्रम का मकसद उन छात्राओं को आगे बढ़ाना है, जिनकी रुचि विज्ञान और तकनीक (STEM) में बहुत ज्यादा है. इसके जरिए सरकारी स्कूलों की प्रतिभाशाली बच्चियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव (इंटरनेशनल एक्सपोजर) और व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है.
कैसे हुआ इन 5 होनहारों का चयन?
इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था. इसके लिए एक पूरी योजनाबद्ध प्रक्रिया अपनाई गई
फर्स्ट स्टेप
शुरुआत में 400 से ज्यादा छात्राओं ने आवेदन किया. उनके विज्ञान के ज्ञान, सोचने की क्षमता और 'स्टेटमेंट ऑफ पर्पस' (SOP - आवेदन का उद्देश्य) को परखने के बाद 130 छात्राओं को शॉर्टलिस्ट किया गया.
दूसरा स्टेप
इन 130 छात्राओं ने एक रीजनल वर्कशॉप में हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने खुद अपने हाथों से साइंस प्रोजेक्ट्स बनाए और उन्हें सबके सामने पेश किया.
फाइनल सिलेक्शन: इन प्रोजेक्ट्स की बारीकी से जांच की गई और अंत में सबसे बेहतरीन 5 प्रोजेक्ट्स बनाने वाली छात्राओं को अमेरिका जाने के लिए चुना गया.
क्या है सक्षम पहल?
यह पूरा कार्यक्रम दिल्ली सरकार और हनीवेल टेक्नोलॉजीज (Honeywell Technologies) के आपसी सहयोग से चलाई जा रही सक्षम पहल के तहत आयोजित किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की छात्राओं के बीच विज्ञान और तकनीक (STEM) की शिक्षा को मजबूत करना है.
वर्तमान में यह कार्यक्रम 12 स्कूलों में चल रहा है और साल 2029 तक इसके जरिए लगभग 12,000 छात्राओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है. दिल्ली के अलावा इस शानदार पहल को पुणे, बेंगलुरु और गुरुग्राम में भी लागू किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चियों को इसका फायदा मिल सके.
अमेरिका में क्या करेंगी छात्राएं?
चुनी गई छात्राएं अमेरिका के स्पेस एंड रॉकेट सेंटर में एक हफ्ते का समय बिताएंगी. इस दौरान वे प्रैक्टिकल सेशन में हिस्सा लेंगी, अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों को समझेंगी और दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ बातचीत करेंगी. इससे न सिर्फ अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर उनकी समझ बढ़ेगी, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.
इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि भारतीय छात्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान और नए आविष्कारों को लेकर गजब की क्षमता है. उन्होंने भरोसा जताया कि विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने वाली ऐसी पहलों से भविष्य में इस क्षेत्र में लड़कियों की भागीदारी बहुत तेजी से बढ़ेगी.
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