CSIR-NET JRF परीक्षा में लखनऊ और फैजाबाद के दो छात्रों ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. लखनऊ विश्वविद्यालय के एमएससी (MSc) के स्टूडेंट प्रकर्ष मनोहर और फैजाबाद की सोनल शुक्ला ने AIR 2 हासिल की है. दोनों की सफलता की कहानी अलग है, लेकिन एक बात समान है कोचिंग के बजाय खुद पर भरोसा, लगातार मेहनत और बेहतर रणनीति.
लखनऊ के प्रकर्ष ने बिना कोचिंग हासिल की AIR 222 साल के प्रकर्ष मनोहर लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान (Zoology) विभाग में MSc तृतीय सेमेस्टर के छात्र हैं. उन्होंने Joint CSIR-UGC NET JRF (Lifesciences) परीक्षा में AIR 2 हासिल की है.
प्रकर्ष ने NDTV को बताया कि उन्होंने स्कूल से लेकर अब तक किसी तरह की कोचिंग या ट्यूशन नहीं ली. वह सेल्फ स्टडी में विश्वास रखते हैं. उनके मुताबिक पढ़ाई में घंटों की संख्या से ज्यादा जरूरी क्वालिटी टाइम है.
प्रकर्ष की स्कूली शिक्षा नर्सरी से 12वीं तक सिटी मोंटेसरी स्कूल (CMS), राजेंद्र नगर कैंपस-1 से हुई है. वह रेग्यूलर विश्वविद्यालय जाकर थ्योरी और प्रैक्टिकल कक्षाओं में शामिल होते हैं. पढ़ाई के अलावा उन्हें वर्कआउट और संगीत पसंद है. वह ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट भी हैं.
माता-पिता के गाइडेंस से बढ़े आगेप्रकर्ष बताते हैं कि उनकी एकेडेमिक जर्नी में माता-पिता की अहम भूमिका रही है. कक्षा 10 तक उनके माता-पिता ने उन्हें पढ़ाया, जबकि कक्षा 11 से उन्होंने स्वाध्याय शुरू किया. आज भी वह अपने माता-पिता से मार्गदर्शन लेते हैं. उनके पिता डॉ. रवि मनोहर चिकित्सक हैं और मां स्वाति मनोहर गृहिणी हैं. उनकी मां ने फूड टेक्नोलॉजी (Food Technology) में MSc किया है.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रकर्ष सलाह देते हैं कि खुद पर विश्वास रखें और मेहनत करें, लेकिन पढ़ाई को तनाव न बनने दें. परिवार और दोस्तों के लिए समय निकालने के साथ-साथ एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज में भी हिस्सा लेना चाहिए.
फैजाबाद की सोनल ने भी हासिल की AIR 2वहीं फैजाबाद की सोनल शुक्ला ने भी CSIR-NET JRF में AIR 2 हासिल की है. सोनल की स्कूली शिक्षा फैजाबाद से हुई. उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से UG और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से PG किया, जहां वह गोल्ड मेडलिस्ट भी रहीं.
सोनल के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले वह तीन बार GATE क्वालिफाई कर चुकी हैं. इसके अलावा NET में एक बार रैंक 5 और एक बार रैंक 34 हासिल कर चुकी हैं. सोनल के मुताबिक AIR 2 की सफलता उनकी लंबी तैयारी और लगातार सुधार की यात्रा का एक तरह से शानदार पड़ाव है.
सोनल ने NDTV को बताया कि उन्होंने पढ़ाई के घंटों पर फोकस करने के बजाय रोजाना के टारगेट तय किए और उन्हें पूरा करने की कोशिश की. हर प्रयास से उन्होंने अपनी गलतियों को समझा और अपनी तैयारी की रणनीति को बेहतर बनाया. उनके पिता शिक्षक हैं, मां गृहिणी हैं और उनका एक छोटा भाई है. सोनल के मुताबिक परिवार का उन्हें हमेशा पूरा सहयोग मिला.
दोनों का लक्ष्य रिसर्च और आगे बढ़ने काCSIR-NET JRF में AIR 2 हासिल करने के बाद दोनों छात्रों के लक्ष्य भी स्पष्ट हैं. सोनल आगे Geologist बनने और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं. वहीं प्रकर्ष अपनी उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं.
दोनों की सफलता उन छात्रों के लिए भी प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. सोनल जहां बेसिक्स मजबूत करने, PYQs हल करने और छोटे-छोटे टारगेट बनाकर रणनीतिक तैयारी पर जोर देती हैं, वहीं प्रकर्ष का मानना है कि पढ़ाई की क्वांटिटी से ज्यादा उसकी क्वालिटी महत्वपूर्ण है. दोनों की कहानी बताती है कि सफलता के लिए लगातार प्रयास, सही रणनीति और खुद पर भरोसा बेहद जरूरी है.
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