दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने स्टूडेंट एंगेजमेंट के लिए एक खास पहल शुरू की है, जिसका नाम "कॉफी विद वाइस-चांसलर" दिया गया है. इस पहल का मकसद एडमिनिस्ट्रेशन और स्टूडेंट्स के बीच सीधी बातचीत को बढ़ावा देना है. इस पहल के तहत सोमवार को वाइस-चांसलर योगेश सिंह ने मिरांडा हाउस के 10 स्टूडेंट्स से बातचीत भी की. बातचीत के दौरान इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई टेक्नोलॉजी पर भी चर्चा की गई. AI के बारे में एक स्टूडेंट के सवाल का जवाब देते हुए, वाइस-चांसलर योगेश सिंह ने सलाह दी कि AI को मास्टर के बजाय असिस्टेंट बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजी के आने से अक्सर चिंता होती है, लेकिन उनकी अहमियत को पहचानना और AI जैसी नई क्रांतियों का पूरा फायदा उठाना चाहिए.
शिक्षा का मुख्य मकसद जिम्मेदार और अच्छे इंसान बनाना
VC ने कहा कि पिछले दस सालों में देश में काफ़ी बदलाव आया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में बड़े काम करने की बहुत ज़्यादा क्षमता है. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) का जिक्र भी इस दौरान VC ने किया. वैल्यू एडिशन कोर्स (VACs) और स्किल एनहांसमेंट कोर्स (SECs) पर पूछे गए सवालों के जवाब में, VC ने कहा कि शिक्षा का मुख्य मकसद ज़िम्मेदार और अच्छे इंसान बनाना है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पढ़ाई के साथ-साथ, शिक्षा में मजबूत नैतिक मूल्य और देशभक्ति की भावना भी होनी चाहिए.
21वीं सदी में कई चुनौतियां और मौके हैं
स्टूडेंट्स की भूमिका और जिम्मेदारियों पर एक और सवाल का जवाब देते हुए, सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में कई चुनौतियां और मौके हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने साल 2047 तक खुद को एक विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है. इसे हासिल करने के लिए हमें तेज दिमाग वाले लोगों की जरूरत है. हमें होशियार बेटियों की ज़रूरत है. अगले 25 सालों में, हमें अपने देश को एक विकसित देश बनाने के काम के लिए खुद को समर्पित करना होगा. यह सही समय है, और यह सही मौका है.
वाइस-चांसलर ने चर्चा के दौरान स्टूडेंट्स के लिए सेफ माहौल बनाने पर भी जोर दिया और का कि पूरे कैंपस में CCTV कैमरे लगाने का इंतज़ाम किया जा रहा है.
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