प्राइमरी यानी कक्षा 5 तक की पढ़ाई तो बच्चे मजे-मजे में करते हैं. आमतौर पर अभिभावक भी उन पर पढ़ाई का दबाव नहीं डालते. लेकिन जैसे ही बच्चे कक्षा 6 में आते हैं तो पढ़ाई का स्तर बढ़ना शुरू होता है. ऐसे में माता-पिता को ये भी पता चलने लगता है कि बच्चा किन विषयों में कमजोर है. इस स्तर पर सिलेबस थोड़ा कठिन हो जाता है और बच्चों को सेल्फ-स्टडी की आदत डालनी पड़ती है. इस समय में बच्चे की पढ़ाई पर ध्यान दिया जाए तो उसके कमजोर विषय भी मजबूत बन सकते हैं.
क्लास 6 में बच्चे को इन तरीकों से पढ़ाएं हिंदी
बच्चा किसी भी विषय में तब परफॉर्म करता है जब उसका बेसिक मजबूत होता है. इसलिए बच्चे को हिंदी रीडिंग कराना शुरू करें. इससे ये समझ आएगा कि विषय में वह कितना तेज है.
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बच्चे को हिंदी रीडिंग कराना जितना महत्वपूर्ण है उतना ही जरूरी है कि वह हिंदी लिखे भी. इसके लिए उसे हिंदी का सुलेख लिखवाएं. राइटिंग करवाएं. किसी भी टॉपिक पर लिखने को कहें.
इस उम्र में बच्चों को कहानियां पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. बच्चे से कहें कि वो आपको हिंदी की किताब से कहानी पढ़कर सुनाए. इससे बच्चे का ना सिर्फ भाषा के प्रति प्रेम बढ़ेगा बल्कि शब्दावली भी अच्छी होगी.
बच्चे को डिजिटल माध्यम से पढ़ाएं. कई एप्स हैं जो बच्चों को हिंदी लिखना, बोलना अच्छे से सिखा सकते हैं. बच्चे को हिंदी वर्णमाला, शब्द, व्याकरण से जुड़े वीडियोज दिखा सकते हैं.
बच्चा जो कुछ स्कूल में पढ़कर आया है, उसे घर में सब पढ़ाएं. इससे स्कूल में पढ़ाया हुआ बच्चे को याद हो जाता है.
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